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कश्मीरी पंडितों का पलायन एक अनसुलझी नैतिक और सभ्यतागत त्रासदी: सत शर्मा

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जम्मू, 19 जनवरी (हि.स.)।

जम्मू-कश्मीर भाजपा अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद सत शर्मा (सीए) ने कहा कि कश्मीरी पंडित समुदाय के लिए जनवरी का महीना जातीय सफाए, जबरन विस्थापन और सभ्यतागत क्षति की एक अनसुलझी त्रासदी की याद दिलाता है जिसके लिए तीन दशक से अधिक समय बाद भी न्याय, सम्मान और नैतिक साहस की आवश्यकता बनी हुई है।

सत शर्मा ने विस्थापित कश्मीरी पंडित समुदाय के साथ हुए अत्याचारों को याद करते हुए कहा कि जनवरी का महीना आतंक, विस्थापन और एक लंबे समय तक चले उस विस्मृति की याद दिलाता है जो तीन दशक से अधिक समय बाद भी उनके सामूहिक अस्तित्व को प्रभावित कर रही है। उन्होंने कहा कि कश्मीरी हिंदुओं विशेषकर कश्मीरी पंडितों के लिए जनवरी का महीना जबरन विस्थापन की एक ऐसी घटना की वर्षगांठ है जिसे बड़े पैमाने पर अनदेखा किया गया है और जो आज तक अनसुलझी है।

सत शर्मा ने कहा कि जनवरी का महीना स्मरण का महीना है: लक्षित हिंसा, जातीय सफाए, विस्थापन और एक सभ्यतागत विच्छेद का।जो न केवल दशकों, बल्कि सदियों तक फैला हुआ है। 1989-90 में कश्मीरी हिंदुओं को सुनियोजित आतंक और धमकी के अभियान के माध्यम से उनके घरों से बेदखल कर दिया गया था। हत्याओं, धमकि सार्वजनिक रूप से उन्हें खत्म करने की अपीलों ने वहां रहना असंभव बना दिया था।

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हिन्दुस्थान समाचार / रमेश गुप्ता