गांदरबल मुठभेड़ को लेकर जम्मू-कश्मीर विधानसभा में हंगामा
जम्मू, 04 अप्रैल (हि.स.)। जम्मू-कश्मीर विधानसभा के बजट सत्र के अंतिम दिन शनिवार को गांदरबल मुठभेड़ को लेकर सदन में जोरदार हंगामा देखने को मिला। नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी), कांग्रेस और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के विधायकों ने हाल ही में हुई मुठभेड़ की न्यायिक जांच की मांग उठाई और इसे गंभीर मामला बताया।
दरअसल, 31 मार्च को अरहामा के जंगलों में हुई मुठभेड़ में सेना ने एक व्यक्ति को मार गिराने का दावा किया था, जिसकी पहचान गांदरबल निवासी राशिद अहमद मुगल के रूप में हुई। सेना का कहना है कि वह एक आतंकवादी था, लेकिन मृतक के परिवार ने इस दावे को खारिज करते हुए मुठभेड़ को फर्जी बताया है। परिवार का आरोप है कि राशिद का आतंकवाद से कोई संबंध नहीं था और उन्होंने शव को अंतिम संस्कार के लिए वापस करने की मांग की है।
इस बीच, जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने शुक्रवार को मामले की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं और सात दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने को कहा है।
शनिवार को सदन की कार्यवाही शुरू होते ही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को छोड़कर सत्ता पक्ष और विपक्ष के अधिकांश विधायकों ने इस घटना की निंदा की और अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर से इस मुद्दे पर बयान देने की मांग की।
नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ विधायक मुबारक गुल ने इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि यदि किसी निर्दोष की हत्या हुई है तो यह बेहद गंभीर मामला है और इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने सदन से इस घटना के खिलाफ कड़ा संदेश देने की अपील की।
पूर्व न्यायाधीश और एनसी विधायक हसनैन मसूदी ने कहा कि सम्मानजनक अंतिम संस्कार का अधिकार एक मौलिक और संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने जोर दिया कि इस अधिकार का हनन न्याय और लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करता है। उन्होंने मृतक के परिवार की मांग का समर्थन करते हुए शव सौंपने की अपील की।
कांग्रेस विधायक निजामुद्दीन भट ने कहा कि इतने संवेदनशील मामले में केवल प्रशासनिक जांच पर्याप्त नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि निष्पक्षता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए न्यायिक जांच आवश्यक है, क्योंकि प्रशासनिक जांच में हितों का टकराव हो सकता है।
नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायक मीर सैफुल्लाह ने घटना को बेहद चिंताजनक बताते हुए कहा कि दोषियों की पहचान कर उन्हें सजा दिलाने के लिए न्यायिक जांच जरूरी है।
कांग्रेस विधायक इरफान हाफिज लोन ने सदन के बाहर भी विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने एक तख्ती के माध्यम से मृतक के परिवार की बात सुनने और उन्हें न्याय दिलाने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि सच्चाई सामने लाने के लिए प्रभावी और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
वहीं, भाजपा के आर.एस. पठानिया ने कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर सदन में चर्चा को लेकर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि इसी आधार पर उनके सवाल पहले खारिज किए जा चुके हैं। इस पर अध्यक्ष ने जवाब देते हुए कहा कि उपराज्यपाल द्वारा पहले ही समयबद्ध जांच के आदेश दिए जा चुके हैं।
गौरतलब है कि मुठभेड़ों में मारे गए आतंकवादियों के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत राशिद अहमद मुगल को कुपवाड़ा जिले में पुलिस द्वारा दफनाया गया है। हालांकि, इस पूरे मामले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस तेज हो गई है और अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी है।--------------
हिन्दुस्थान समाचार / बलवान सिंह

