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जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने की 'नशा मुक्त भारत अभियान' की प्रगति की समीक्षा

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जम्मू, 28 मार्च (हि.स.)। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने शनिवार को लोक भवन, जम्मू में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में केंद्र शासित प्रदेश में चल रहे नशामुक्त भारत अभियान की प्रगति की समीक्षा की।

बैठक के दौरान उपराज्यपाल ने जम्मू-कश्मीर के युवाओं को निशाना बनाने वाले नशा तस्करी नेटवर्क के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि युवाओं को नशे की लत में धकेलने के लिए सुनियोजित और दुर्भावनापूर्ण प्रयास किए जा रहे हैं। मादक पदार्थों की तस्करी और नार्को-आतंकवाद के पूरे तंत्र को समाप्त करने के लिए सख्त प्रवर्तन, मजबूत निवारक उपायों और बहुआयामी कार्ययोजना के साथ समग्र सरकारी दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है।

मनोज सिन्हा ने नशामुक्त जम्मू-कश्मीर के लक्ष्य को हासिल करने के लिए जनभागीदारी और समन्वित प्रयासों पर जोर दिया। बैठक में प्रवर्तन, सूचना संचार, परामर्श, उपचार और पुनर्वास जैसे पांच प्रमुख क्षेत्रों पर विस्तार से चर्चा की गई। साथ ही भ्रामक सूचनाओं से निपटने के लिए सोशल मीडिया की सख्त निगरानी प्रणाली विकसित करने पर भी विचार किया गया।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि विशेष रूप से शैक्षणिक संस्थानों में निवारक उपायों को मिशन मोड में लागू किया जाए। इसके अलावा, नशीले पदार्थों से जुड़े आतंकवादी नेटवर्क के अवशेषों की पहचान कर उन्हें कड़ी सजा देने के निर्देश भी दिए गए।

उपराज्यपाल ने नागरिकों से अपील की कि वे नशे की लत और तस्करी से संबंधित मामलों की सूचना पुलिस और प्रशासन को दें। उन्होंने आगामी व्यापक नशा जागरूकता अभियान की तैयारियों की भी समीक्षा की।

उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ इस लड़ाई में धार्मिक नेताओं, सामाजिक संगठनों, पूर्व सैनिकों, राष्ट्रीय कैडेट कोर, राष्ट्रीय सेवा योजना, स्काउट्स एंड गाइड्स तथा राजनीतिक नेतृत्व की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। साथ ही पिछले एक वर्ष में नशामुक्त भारत अभियान के तहत किए गए कार्यों का मूल्यांकन करने के निर्देश दिए।

बैठक में नशामुक्त जम्मू-कश्मीर पोर्टल से सभी जिलों को जोड़ने, नोडल अधिकारियों की नियुक्ति, सामुदायिक सहायता कार्यक्रमों, प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण, नशामुक्ति बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, नशा उपचार सुविधाओं के विस्तार, नशामुक्ति रजिस्ट्री पोर्टल और मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOP) के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी चर्चा हुई।

इसके अलावा, उपराज्यपाल ने सीमावर्ती गांवों के समावेशी विकास के लिए जीवंत ग्राम (वाइब्रेंट विलेज) प्रोग्राम को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।

बैठक में मुख्य सचिव अटल दुल्लू, वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव शैलेंद्र कुमार, गृह विभाग के प्रधान सचिव चंद्रकर भारती, उपराज्यपाल के प्रधान सचिव डॉ. मनदीप के. भंडारी, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के आयुक्त सचिव एम. राजू, प्रशासनिक सचिव, संभागीय आयुक्त जम्मू रमेश कुमार, सूचना एवं आपातकालीन सरकारी अधिकारी जम्मू भी सेन तुती, सूचना एवं कश्मीर के सूचना एवं आपातकालीन सुरक्षा अधिकारी सुजीत कुमार और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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हिन्दुस्थान समाचार / बलवान सिंह