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जम्मू-कश्मीर को 2030 का लक्ष्य पूरा करने के लिए नए एक्सपोर्टर बनाने की जरूरत : उमर

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श्रीनगर, 29 जून (हि.स.)। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सोमवार को कहा कि 2030 तक एक्सपोर्ट को दोगुना करने का लक्ष्य हासिल करने के लिए जम्मू-कश्मीर को एक्सपोर्टर्स की एक नई पीढ़ी तैयार करनी होगी और अपनी एक्सपोर्ट बास्केट में विविधता लानी होगी।

श्रीनगर में इंटरनेशनल बायर-सेलर मीट के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए उमर ने कहा कि केंद्र सरकार के 2030 तक एक्सपोर्ट दोगुना करने के लक्ष्य को देखते हुए जम्मू-कश्मीर के पास अपने एक्सपोर्ट बेस को काफी हद तक बढ़ाने के लिए केवल चार साल बचे हैं। उन्होंने कहा कि हमें उन लोगों का समर्थन करना होगा, जो पहले से ही एक्सपोर्ट कर रहे हैं। साथ ही हमें उन लोगों में से भी एक्सपोर्टर्स तैयार करने होंगे, जो आज एक्सपोर्ट नहीं कर रहे हैं। उनके बाज़ार अभी जम्मू-कश्मीर या ज़्यादा से ज़्यादा देश के कुछ हिस्सों तक ही सीमित हैं। हमारी कोशिश उनके लिए एक्सपोर्ट को आसान बनाना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बायर-सेलर मीट महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह नए बाज़ारों की तलाश के लिए इंटरनेशनल बायर्स, एक्सपोर्टर्स, मैन्युफैक्चरर्स, कारीगरों और स्वयं-सहायता समूहों को एक मंच पर लाती है। जम्मू-कश्मीर के अनोखे व्यापार इतिहास पर प्रकाश डालते हुए उमर ने कहा कि इस क्षेत्र ने पारंपरिक रूप से औपचारिक एक्सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर हुए बिना अपने उत्पादों का एक्सपोर्ट किया है। उन्होंने कहा कि हमारे खरीददार पर्यटकों के रूप में हमारे पास आते थे। वे हमारे उत्पाद खरीदते थे और उन्हें दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में ले जाते थे। इस तरह खरीदारों और कारीगरों के बीच कई जीवन भर के रिश्ते बने। हमें शायद ही कभी आयोजित बायर-सेलर मीट या हस्तशिल्प मेलों में भाग लेना पड़ता था क्योंकि खरीदार अपने आप कश्मीर आते थे।

उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान में जम्मू-कश्मीर का लगभग 98 प्रतिशत एक्सपोर्ट केवल चार ज़िलों से होता है जबकि बाकी ज़िलों का हिस्सा केवल दो प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि हमारे सामने चुनौती यह है कि एक्सपोर्टर्स की संख्या कैसे बढ़ाई जाए और जम्मू-कश्मीर के हर क्षेत्र में एक्सपोर्ट का विस्तार कैसे किया जाए। उन्होंने एक्सपोर्ट प्रक्रियाओं को आसान बनाने के लिए जम्मू-कश्मीर में एक ड्राई पोर्ट स्थापित करने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।

उन्होंने कहा कि हमें तुरंत एक ड्राई पोर्ट की ज़रूरत है। आज हमारा सामान यहाँ से एक्सपोर्ट तो होता है, लेकिन अक्सर उस पर मुहर कहीं और लगती है, जिसकी वजह से एक्सपोर्ट का क्रेडिट किसी दूसरे राज्य को मिल जाता है। हम यह पक्का करने के लिए काम कर रहे हैं कि एक्सपोर्ट से जुड़ी सभी प्रक्रियाएँ जम्मू-कश्मीर में ही पूरी हों, ताकि हमारे उद्यमियों के लिए एक्सपोर्ट करना आसान हो जाए और हमारा एक्सपोर्ट हमारे अपने खाते में सही ढंग से दिखे।

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हिन्दुस्थान समाचार / बलवान सिंह