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देश में सबसे बड़ा आरोप 1987 की धांधली का है जिसका नेशनल कॉन्फ्रेंस और अब्दुल्ला परिवार को फायदा हुआ :सुनील शर्मा

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श्रीनगर, 12 अक्टूबर (हि.स.)।

जम्मू और कश्मीर विधानसभा में विपक्ष के नेता सुनील शर्मा ने सोमवार को कांग्रेस पर 1987 के जम्मू और कश्मीर विधानसभा चुनावों में धांधली का आरोप लगाया और कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस और अब्दुल्ला परिवार को इस चुनावी गड़बड़ी से फायदा हुआ है।

श्रीनगर के डलगेट में पत्रकारों से बात करते हुए शर्मा ने ये टिप्पणियां विपक्षी इंडिया ब्लॉक के चुनावी अनियमितताओं के अभियान और चुनावी प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता की मांग को लेकर किए जा रहे विरोध प्रदर्शनों पर प्रतिक्रिया देते हुए कीं।

शर्मा ने कहा कि अगर यह आरोप किसी पर लागू होता है तो वह 1987 की धांधली पर लागू होता है। देश में सबसे बड़ा आरोप 1987 की धांधली का है। यह 1987 की चोरी है।

उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने जम्मू और कश्मीर में वोट चुराए और चुनावी पारदर्शिता पर नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेतृत्व के रुख पर सवाल उठाया।

उन्होंने कहा कि 1987 का उदाहरण पूरी दुनिया में मौजूद है। उन्होंने कहा कि अब्दुल्ला परिवार को चुनाव से जुड़े आरोपों के बारे में सवालों के जवाब देने होंगे। शर्मा ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला पर विपक्ष के चुनाव प्रचार में उनकी भागीदारी को लेकर भी निशाना साधा और जम्मू-कश्मीर में चुनावी प्रक्रिया की प्रशंसा करने के बाद चुनाव संचालन पर उनके रुख पर सवाल उठाए।

उमर अब्दुल्ला की विधानसभा चुनावों पर पिछली टिप्पणियों का जिक्र करते हुए शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री ने चुनावों को असाधारण रूप से अच्छा बताया था लेकिन अब चुनावी पारदर्शिता पर सवाल उठा रहे हैं। दो साल पहले उन्होंने कहा था कि इतिहास में पहली बार इतने सुंदर चुनाव हुए हैं। यह बात उमर अब्दुल्ला के मुंह से निकली थी।

उन्होंने उमर अब्दुल्ला की इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों के इस्तेमाल पर कथित टिप्पणियों का भी जिक्र किया और पूछा कि मुख्यमंत्री अब चुनावी प्रक्रिया पर सवाल क्यों उठा रहे हैं। अगर चुनाव में गड़बड़ी हुई तो आपका चुनाव भी गलत था। आप नैतिक आधार पर इस्तीफा दें।

इंडिया ब्लॉक के सड़क प्रदर्शनों की आलोचना करते हुए भाजपा नेता ने कहा कि राजनीतिक दलों को रोजमर्रा की जिंदगी में बाधा डालने वाले प्रदर्शनों के बजाय लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के माध्यम से जनता का समर्थन हासिल करना चाहिए। अगर आप अपनी ताकत दिखाना चाहते हैं तो दो लाख या पांच लाख लोगों को इकट्ठा करें। अगर जंतर-मंतर पर जगह नहीं है तो स्टेडियम या रामलीला मैदान में इकट्ठा हों। अपने नारे बुलंद करो, और जब लोग तुम्हें स्वीकार करेंगे तो वे तुम्हें सत्ता में लाएंगे।

शर्मा ने कहा कि विरोध प्रदर्शनों से आवश्यक सेवाओं में बाधा नहीं आनी चाहिए और न ही छात्रों, मरीजों और व्यवसायों सहित आम जनता को असुविधा होनी चाहिए। लोगों को स्कूल जाना है, लोगों को अस्पतालों में जाना है, लोगों को व्यवसाय खोलने हैं। अगर आप सभी सड़कें बंद कर देंगे तो कोई आपको कहीं भी जाने नहीं देगा।

उन्होंने विरोध प्रदर्शनों के दौरान एक महिला पुलिस अधिकारी के साथ कथित बातचीत को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी की आलोचना करते हुए कहा कि ऐसा व्यवहार अस्वीकार्य है। समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के मुद्दे पर शर्मा ने कहा कि इसे जम्मू और कश्मीर में देश के बाकी हिस्सों के साथ लागू किया जाएगा और उमर अब्दुल्ला के इस कथित दावे को खारिज कर दिया कि यह कानून कश्मीर में कभी लागू नहीं होगा।

उन्होंने कहा कि 1987 के जम्मू और कश्मीर विधानसभा चुनाव इस क्षेत्र के राजनीतिक इतिहास में एक विवादास्पद अध्याय बने हुए हैं और सशस्त्र उग्रवाद के उदय की चर्चाओं में चुनावी धांधली के आरोपों का अक्सर जिक्र किया जाता है। कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस ने चुनावों के लिए चुनावी गठबंधन किया था जिसे एनसी-कांग्रेस गठबंधन ने जीता था।

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हिन्दुस्थान समाचार / बलवान सिंह