जम्मू और कश्मीर सदियों से 'सर्व धर्म संभव' की भावना का प्रतिनिधित्व करता रहा है- उपराज्यपाल
श्रीनगर, 04 जून (हि.स.)। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने गुरुवार को कहा कि जम्मू और कश्मीर सदियों से 'सर्व धर्म संभव' की भावना का प्रतिनिधित्व करता रहा है और दुनिया में सह-अस्तित्व और सांप्रदायिक सद्भाव के बेहतरीन उदाहरणों में से एक बना हुआ है।
एसकेआईसीसी श्रीनगर में 'ऋषिवर' अंतर-विश्वास सम्मेलन को संबोधित करते हुए उपराज्यपाल ने कहा कि सद्भाव और आपसी सम्मान का सार प्राचीन काल से भारतीय सभ्यता में गहराई से निहित रहा है।
उपराज्यपाल सिन्हा ने कहा कि सबसे पुराने ग्रंथ ऋग्वेद में दो संस्कृत शब्द जस्टम और देवभूत का उल्लेख है जो सभी मनुष्यों में मौजूद सद्भाव और दिव्य प्रकाश का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि ऋग्वेद सिखाता है कि सर्वशक्तिमान बिना किसी भेदभाव के समाज में प्रत्येक व्यक्ति के गुणों और प्रकाश का सामंजस्य स्थापित करते हैं।
उन्होंने कहा कि अगर कोई इस दर्शन की स्पष्ट झलक देखना चाहता है तो यह जम्मू-कश्मीर में देखा जा सकता है जो सदियों से लगभग सभी प्रमुख धर्मों का घर रहा है। उपराज्यपाल ने कहा कि जहां दुनिया भर के कई देशों ने बहुत बाद में सह-अस्तित्व के बारे में बोलना शुरू किया, वहीं सर्व धर्म संभव प्राचीन काल से ही भारत की सभ्यता के विचार का एक अभिन्न अंग बना हुआ है।
उन्होंने कहा कि सह-अस्तित्व भारत में केवल एक विचार नहीं था बल्कि हजारों साल पहले जीवन जीने का एक तरीका था, उन्होंने कहा कि भारतीय परंपराओं ने हमेशा विविध मान्यताओं और विचारधाराओं का सम्मान किया है। सनातन धर्म का उल्लेख करते हुए सिन्हा ने कहा कि यह दुनिया की सबसे पुरानी आस्था परंपराओं में से एक है जिसकी जड़ें 8,000 साल पुरानी हैं।
उन्होंने कहा कि इतिहास में कई संघर्षों का सामना करने के बावजूद सनातन धर्म जीवित रहा क्योंकि इसमें सह-अस्तित्व, सभी मान्यताओं के प्रति सम्मान और विविधता की स्वीकृति पर जोर दिया गया था।
उपराज्यपाल ने कहा कि दुनिया भर के विद्वान और शोधकर्ता इस बात से सहमत हैं कि सर्व धर्म संभव का दर्शन सनातन धर्म के सिद्धांतों से उभरा है। अथर्ववेद का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि प्राचीन ऋषियों ने एक ऐसे समाज की कल्पना की थी जहां विभिन्न धर्मों, मान्यताओं और चेतना के लोग एक सामंजस्यपूर्ण परिवार के सदस्यों की तरह एक साथ रहते थे। उन्होंने आगे कहा कि यीशु से लगभग 1,400 से 2,000 साल पहले रचित यजुर्वेद ने प्रत्येक व्यक्ति को दोस्ती और आपसी सम्मान के साथ देखने के विचार का प्रचार किया था।
सिन्हा ने भगवद गीता का भी हवाला देते हुए कहा कि भगवान कृष्ण ने घोषणा की थी कि लोग विभिन्न मार्गों से सर्वशक्तिमान के पास जाते हैं और दिव्य हर किसी को उनकी आस्था और भक्ति के अनुसार पूरा करता है। कश्मीर की ऐतिहासिक विरासत पर प्रकाश डालते हुए उपराज्यपाल ने कहा कि इतिहासकारों और राजतरंगिणी ने उल्लेख किया है कि श्रीनगर की स्थापना सम्राट अशोक ने की थी जिन्होंने सांप्रदायिक सद्भाव और धार्मिक सहिष्णुता के आदर्शों को दृढ़ता से बढ़ावा दिया था।
उन्होंने कहा कि अशोक ने पत्थर के शिलालेखों पर लिखा था कि जो व्यक्ति दूसरे धर्म का अपमान करते हुए अपने धर्म का महिमामंडन करता है, वह वास्तव में अपने धर्म को सबसे अधिक नुकसान पहुंचाता है।
बौद्ध धर्म और जैन धर्म की शिक्षाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अन्य धर्मों का सम्मान करने से अपने धर्म की गरिमा भी बढ़ती है।
उपराज्यपाल ने कहा कि भारत ने कई आधुनिक सभ्यताओं के उभरने से बहुत पहले ही अपने विचारों और कार्यों के माध्यम से दुनिया को शांति का मार्ग दिखाया था।
उन्होंने कहा कि ईसाई धर्म, इस्लाम और सूफीवाद सहित विभिन्न धर्मों ने बाद में भारतीय दर्शन को प्रभावित किया, जबकि सनातन धर्म का सह-अस्तित्व का संदेश विश्व स्तर पर समाजों को प्रेरित करता रहा।
ऋग्वेद का हवाला देते हुए उन्होंने कहाः सत्य एक है, लेकिन विद्वान इसकी अलग-अलग तरीकों से व्याख्या करते हैं। सिन्हा ने कहा कि जम्मू और कश्मीर इस समावेशी दर्शन का एक जीवित उदाहरण है।
उन्होंने कहा कि कश्मीर में इस्लाम और सूफीवाद के आगमन से पहले दार्शनिक वासुगुप्त ने शिव सूत्र और सार्वभौमिक चेतना पर केंद्रित आध्यात्मिक शिक्षाओं का प्रचार किया था।
कल्हण की राजतरंगिणी का उल्लेख करते हुए उपराज्यपाल ने कहा कि पाठ में उल्लेख किया गया है कि जम्मू-कश्मीर में तीर्थयात्रा और पवित्रता से रहित भूमि का एक छोटा सा टुकड़ा भी नहीं है। उन्होंने रहस्यवादी कवि लाल देद का भी हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने हिंदुओं और मुसलमानों के बीच विभाजन के खिलाफ उपदेश दिया और लोगों से अपने सच्चे रूप और मानवता को पहचानने का आग्रह किया। सिन्हा ने कहा कि शेख नूर-उद-दीन नूरानी (नंद ऋषि) ने कश्मीर में विभिन्न परंपराओं के बीच सामाजिक सद्भाव और एकता को बहुत मजबूत किया। उन्होंने कहा कि विभिन्न धर्मों ने जम्मू-कश्मीर में अपना सबसे अच्छा संगम पाया है। परंपराओं का इतना सुंदर मिश्रण दुनिया में कहीं और शायद ही कभी देखा जाता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / बलवान सिंह

