home page

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में जनगणना 2027 की तैयारियों को लेकर एक महत्वपूर्ण चरण पूरा कर लिया गया

 | 

जम्मू,, 31 अक्टूबर (हि.स.)।

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में जनगणना 2027 की तैयारियों को लेकर एक महत्वपूर्ण चरण पूरा कर लिया गया है। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के चीफ प्रिंसिपल सेंसस ऑफिसर और डायरेक्टर सेंसस ऑपरेशंस, एएसआई अमित शर्मा ने जम्मू में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया कि दोनों केंद्र शासित प्रदेशों में डिस्ट्रिक्ट सेंसस हैंडबुक यानी डीसीएचबी से जुड़ा फील्ड सर्वे पूरा कर लिया गया है। इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर के उन इलाकों में फरवरी 2027 में होने वाली जनसंख्या गणना की तैयारियां भी तेज कर दी गई हैं जहां सर्दियों के दौरान भारी बर्फबारी के कारण आवाजाही प्रभावित नहीं होती।

अमित शर्मा ने बताया कि डीसीएचबी के तहत गांवों और कस्बों में उपलब्ध सुविधाओं और बुनियादी ढांचे से जुड़ी जानकारी इकट्ठा की गई है। अब संबंधित अधिकारी इस जानकारी की जांच करेंगे ताकि सभी आंकड़े सही और पूरे हों। इस दौरान गांवों के लिए करीब 400 और कस्बों के लिए 420 सवालों से जुड़ी जानकारी की जांच की जाएगी। अगर किसी जानकारी में कमी या गलती पाई जाती है तो उसे ठीक किया जाएगा। यह काम नवंबर 2026 के मध्य तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है जिसके बाद जांचे गए आंकड़ों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।

उन्होंने बताया कि इस सर्वे में शिक्षा, स्वास्थ्य, पीने के पानी, साफ-सफाई, परिवहन, संचार और अन्य जरूरी सुविधाओं से जुड़ी जानकारी शामिल है। ये आंकड़े 31 दिसंबर 2025 तक की स्थिति को दर्शाते हैं। अमित शर्मा के मुताबिक यह जानकारी जिला प्रशासन, स्थानीय स्तर पर योजनाएं बनाने, विकास कार्यों की जरूरतों को समझने और शोध कार्यों के लिए काफी उपयोगी साबित होगी।

वहीं अमित शर्मा ने बताया कि फरवरी 2027 में जम्मू-कश्मीर के गैर-बर्फबारी वाले इलाकों में जनसंख्या गणना की जाएगी। इसके लिए अधिकारियों और कर्मचारियों की ट्रेनिंग का कार्यक्रम भी तैयार किया गया है। जिला स्तर के अधिकारियों की ट्रेनिंग नवंबर के मध्य तक पूरी करने का लक्ष्य है। मास्टर ट्रेनरों को नवंबर के तीसरे सप्ताह में फील्ड ट्रेनरों को दिसंबर के पहले और दूसरे सप्ताह में तथा जनगणना करने वाले कर्मचारियों और सुपरवाइजरों को दिसंबर के तीसरे सप्ताह से जनवरी 2027 के मध्य तक ट्रेनिंग दी जाएगी।

उन्होंने कहा कि जनगणना के दौरान विशेष संस्थानों और ऐसे स्थानों पर भी ध्यान दिया जाएगा जहां सामान्य घरों से अलग व्यवस्था में लोग रहते हैं। इनमें रक्षा प्रतिष्ठान, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के संस्थान और अन्य विशेष परिसर शामिल हैं। संबंधित विभागों के साथ तालमेल बनाकर इन स्थानों पर भी जनगणना की तैयारी की जाएगी।

इसके अलावा बेघर लोगों की गिनती को लेकर भी विशेष व्यवस्था की जाएगी। अमित शर्मा ने बताया कि जनगणना टीमें फुटपाथों, बस अड्डों, रेलवे स्टेशनों और अन्य स्थानों पर रहने वाले ऐसे लोगों की पहचान करेंगी जिनके पास रहने के लिए स्थायी घर नहीं है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जनगणना के दौरान कोई भी व्यक्ति गिनती से बाहर न रह जाए।

अमित शर्मा ने कहा कि फिलहाल विभाग की दो प्रमुख प्राथमिकताएं हैं। पहली के तहत इकट्ठा किए गए आंकड़ों की सही तरीके से जांच करना और दूसरी फरवरी 2027 में होने वाली जनसंख्या गणना के लिए सभी जरूरी तैयारियां समय पर पूरी करना। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन और संबंधित विभागों के बीच बेहतर तालमेल, कर्मचारियों की समय पर ट्रेनिंग और हर व्यक्ति की गिनती सुनिश्चित करना जनगणना की सफलता के लिए बेहद जरूरी है।

इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जॉइंट चीफ प्रिंसिपल सेंसस ऑफिसर अरुण कुमार और डिप्टी चीफ प्रिंसिपल सेंसस ऑफिसर मनमीत सिंह लूंबा भी मौजूद रहे।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / अश्वनी गुप्ता