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अदालत ने दहेज से संबंधित हत्या के मामले में एक महिला के पति, सास और देवर समेत परिवार के तीन सदस्यों को दोषी ठहराया

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श्रीनगर, 15 अक्टूबर (हि.स.)। श्रीनगर के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की अदालत ने दहेज से संबंधित हत्या के मामले में एक महिला के पति, सास और देवर समेत परिवार के तीन सदस्यों को दोषी ठहराया है। महिला की जून 2022 में बेमिना में संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु हो गई थी। अदालत ने दो अन्य महिला आरोपियों को बरी कर दिया है।

यह फैसला श्रीनगर के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की अदालत ने पुलिस स्टेशन बटमालू में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 498-ए, 302, 120-बी और 201 के तहत दर्ज एफआईआर संख्या 109/2022 के संबंध में सुनाया।

मृतक तस्लीमा पत्नी शाहनवाज़ अहमद डार निवासी नंद-रशी कॉलोनी-बी, बेमिना 27 जून, 2022 को मृत पाई गईं।

अभियोजन पक्ष के अनुसार नौ साल की शादी के बाद भी गर्भधारण न कर पाने के कारण उनके ससुराल वालों ने उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया था। श्रीनगर के सरकारी मेडिकल कॉलेज में किए गए पोस्टमार्टम में मृत्यु का कारण दम घुटना बताया गया। डॉक्टरों ने यह भी राय दी कि उनके शरीर पर मिले घाव स्वयं द्वारा नहीं किए गए थे।

मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष ने डॉक्टरों, मृतक के परिवार के सदस्यों, एक पड़ोसी और जांच अधिकारियों सहित 23 गवाहों से पूछताछ की। चिकित्सा साक्ष्य और गवाहों के बयान अदालत द्वारा जांचे गए साक्ष्यों का हिस्सा थे। अदालत ने पाया कि चिकित्सकीय साक्ष्यों से हत्या का मामला दम घोंटकर हत्या करने का सिद्ध हो गया है और यह भी पाया कि मृतक अपने पति के साथ वैवाहिक घर में रह रही थी जहाँ अन्य आरोपी भी रहते थे।

अदालत ने माना कि पति, सास और देवर वैवाहिक घर के अंदर मृतक को लगी घातक चोटों के संबंध में कोई विश्वसनीय स्पष्टीकरण देने में विफल रहे। अदालत ने यह भी पाया कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 313 के तहत पूछताछ के दौरान उनके स्पष्टीकरणों ने अभियोजन पक्ष के मामले को और मजबूत किया। हालांकि अदालत ने माना कि साजिश को साबित करने के लिए इस्तेमाल किए गए कॉल डिटेल रिकॉर्ड भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 65-बी के तहत उचित प्रमाण पत्र के अभाव में अस्वीकार्य थे। फिर भी अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि तीनों दोषी आरोपियों की साजिश उनके आचरण और आसपास की परिस्थितियों से समझी जा सकती है। अदालत ने यह भी माना कि आईपीसी की धारा 201 के तहत जो किसी अपराधी को बचाने के लिए साक्ष्य को गायब करने या झूठी जानकारी देने से संबंधित है का आरोप सिद्ध नहीं हुआ है। दो महिला आरोपियों सुमीया और साइका को संदेह का लाभ देते हुए अदालत ने उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया, यह देखते हुए कि सबूतों से अपराध में उनकी संलिप्तता स्पष्ट रूप से साबित नहीं हुई।

तदनुसार हाफ़िज़ा बेगम (सास), परवेज़ अहमद डार उर्फ बिलाल (देवर) और शाहनवाज़ अहमद डार (पति) को आईपीसी की धारा 302 और 120-बी के तहत दोषी ठहराया गया। अदालत ने आदेश दिया कि जमानत पर चल रही हाफ़िज़ा बेगम को हिरासत में लेकर श्रीनगर की केंद्रीय जेल में रखा जाए। जेल अधीक्षक को तीनों दोषियों को सजा की मात्रा पर सुनवाई के लिए अदालत के समक्ष पेश करने का निर्देश दिया गया।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुमन लता