मोदी सरकार के तहत सहकारी आंदोलन राष्ट्रीय प्राथमिकता है: सत शर्मा
जम्मू, 3 फ़रवरी (हि.स.)।
सत शर्मा और अशोक कौल ने जम्मू में सहकारी सम्मेलन को संबोधित किया भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) जम्मू-कश्मीर ने जम्मू के त्रिकुटा नगर स्थित पार्टी मुख्यालय में एक सहकारी सम्मेलन का आयोजन किया जिसमें जम्मू क्षेत्र की विभिन्न सहकारी समितियों के प्रतिनिधि एकत्रित हुए। सम्मेलन को जम्मू-कश्मीर भाजपा अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद सत शर्मा (सीए) और भाजपा महासचिव (संगठन) अशोक कौल ने संबोधित किया।
इस अवसर पर उपस्थित प्रमुख नेताओं में महासचिव संजीता डोगरा, अखिल प्रकोष्ठ प्रभारी वेद शर्मा, सहकारी प्रकोष्ठ संयोजक अंकुश गुप्ता और सम्मेलन समन्वयक एचएस पम्मी शामिल थे। डॉ. निधि पठानिया, वीणा बख्शी, दर्शन लाल, सुनील दत्त शास्त्री, एमआर पुरी, चंद्र भूषण और क्षेत्र के अन्य प्रमुख सहकारी समितियों के प्रतिनिधियों ने भी सम्मेलन में भाग लिया। सम्मेलन को संबोधित करते हुए सत शर्मा ने केंद्र शासित प्रदेश में सहकारी समितियों के कामकाज पर गंभीर चिंता व्यक्त की।
उन्होंने बताया कि पंजीकृत 10,646 सहकारी समितियों में से केवल लगभग 6,000 ही वर्तमान में कार्यरत हैं और इनमें से भी कई नियमित रूप से काम नहीं कर रही हैं। यह स्थिति जम्मू-कश्मीर में सहकारी आंदोलन के प्रभावी कार्यान्वयन और लाभों पर एक मूलभूत प्रश्न उठाती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सहकारी समितियां केवल फाइलों और औपचारिकताओं तक सीमित नहीं रह सकतीं उन्हें आर्थिक सशक्तिकरण का इंजन बनना होगा।
सत शर्मा ने इस बात पर बल दिया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के निर्णायक नेतृत्व में सहकारी आंदोलन को राष्ट्रीय प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने सम्मेलन के दौरान उठाए गए मुद्दों को केंद्रीय गृह मंत्री के समक्ष उठाने और संरचनात्मक सुधारों और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए संसद में उन्हें मजबूती से उठाने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा कि भाजपा यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि सहकारी आंदोलन जम्मू-कश्मीर के हर गांव तक पहुंचे चाहे, वह कितना भी दूरस्थ क्यों न हो और आत्मनिर्भरता और जमीनी स्तर की समृद्धि का स्तंभ बने।
अशोक कौल ने सहकारी आंदोलन के महत्व पर जोर देते हुए जम्मू-कश्मीर के कई उत्पादों को भू-टैग दिलाने में उनकी भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि सहकारी आंदोलन ने केंद्र शासित प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों के कुशल और अकुशल व्यक्तियों के सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा दिया है। उन्होंने जागरूकता, प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता जैसे तीन प्रमुख स्तंभों पर जोर दिया और प्रतिभागियों से सहकारी पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने में सक्रिय योगदान देने का आग्रह किया।
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हिन्दुस्थान समाचार / रमेश गुप्ता

