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मुख्य सचिव ने प्रमुख भूमि अभिलेख डिजिटलीकरण पहलों की समीक्षा की

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जम्मू, 15 मार्च (हि.स.)।

मुख्य सचिव अटल दुल्लू ने आज डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम , ग्राम क्षेत्रों में उन्नत प्रौद्योगिकी के साथ ग्राम सर्वेक्षण और मानचित्रण , विशिष्ट भूमि पार्सल पहचान संख्या और शहरी बस्तियों के राष्ट्रीय भू-स्थानिक ज्ञान-आधारित भूमि सर्वेक्षण (नाक्ष) पर एक व्यापक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की।

इस अवसर पर बोलते हुए मुख्य सचिव ने इन भूमि डिजिटलीकरण पहलों की परिवर्तनकारी क्षमता पर जोर दिया और भारत की कुछ सबसे सफल डिजिटल क्रांतियों के साथ इनकी तुलना की। “ये पहलें यूपीआई और एग्रीस्टैक जैसे अन्य महत्वाकांक्षी कार्यक्रमों की सफलता की तरह ही शासन में क्रांतिकारी बदलाव लाएंगी। हम एक तकनीकी क्रांति देख रहे हैं और जम्मू-कश्मीर को इसमें सक्रिय और अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए,” उन्होंने कहा।

चल रहे डिजिटलीकरण अभियान के प्रत्यक्ष जन लाभ पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में जन शिकायतें भूमि संबंधी मुद्दों से जुड़ी हैं और डिजिटलीकरण प्रक्रिया पूरी होने पर इनका समाधान हो जाएगा। यह जनता के लिए एक बड़ी सेवा है। इससे जनता को अपार सुविधा मिलेगी और विकास एवं शासन के नए द्वार खुलेंगे, मुख्य सचिव ने कहा।

इस अवसर पर बोलते हुए अतिरिक्त मुख्य सचिव (वित्तीय आयुक्त, राजस्व) शालीन काबरा ने भूमि अभिलेखों के डिजिटलीकरण की परिवर्तनकारी क्षमता पर प्रकाश डाला और इसे पारदर्शी, कुशल और नागरिक-केंद्रित शासन की दिशा में एक बड़ा कदम बताया। उन्होंने जोर दिया कि इस पहल से भूमि अभिलेखों की सुलभता, सटीकता और विश्वसनीयता में उल्लेखनीय सुधार होगा जिससे विवाद कम होंगे और राजस्व प्रशासन में जनता का विश्वास बढ़ेगा।

उच्च मानकों को बनाए रखने के महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने यह सुनिश्चित करने के लिए प्रक्रिया के हर चरण में कठोर गुणवत्ता जांच की आवश्यकता पर बल दिया कि डिजिटाइज्ड रिकॉर्ड त्रुटि रहित और प्रामाणिक रहें। उन्होंने संबंधित राजस्व अधिकारियों से उचित सतर्कता और जवाबदेही बरतने का आह्वान किया ताकि डिजिटाइजेशन प्रक्रिया से एक मजबूत, विश्वसनीय और भविष्य के लिए तैयार भूमि रिकॉर्ड प्रबंधन प्रणाली का निर्माण हो सके।

हिन्दुस्थान समाचार / रमेश गुप्ता