जनसांख्यिकीय बदलाव और अवैध आव्रजन को लेकर 10 से 12 अगस्त तक जम्मू दौरे पर रहेगी उच्चस्तरीय समिति
जम्मू, 08 अगस्त (हि.स.)।
जम्मू-कश्मीर में बदलते जनसांख्यिकीय स्वरूप और अवैध आव्रजन से जुड़े मामलों के आकलन को लेकर केंद्र सरकार की गठित उच्चस्तरीय समिति 10 से 12 अगस्त तक जम्मू संभाग के तीन दिवसीय दौरे पर रहेगी। यह समिति का जम्मू-कश्मीर में पहला दौरा होगा। दौरे के दौरान समिति विभिन्न इलाकों का जमीनी जायजा लेने के साथ संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों का भी दौरा करेगी और स्थानीय आबादी के स्वरूप में हुए बदलाव तथा दस्तावेजविहीन प्रवास से जुड़े मामलों की स्थिति की जानकारी जुटाएगी।
समिति उन क्षेत्रों का भी दौरा कर सकती है, जहां विदेशी नागरिकों के कथित तौर पर बसने या अवैध रूप से रह रहे लोगों को लेकर सूचनाएं सामने आई हैं। इस दौरान प्रशासन और संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक कर उपलब्ध आंकड़ों, दस्तावेजों की स्थिति, ऐसे मामलों की संख्या और स्थानीय स्तर पर हुए बदलावों की जानकारी ली जाएगी। समिति यह भी समझने का प्रयास करेगी कि जनसांख्यिकीय बदलाव के पीछे कौन-कौन से कारण हैं और उनका सामाजिक, प्रशासनिक तथा सुरक्षा व्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ सकता है।
जम्मू संभाग अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटा होने के कारण समिति के अध्ययन में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। समिति की अध्यक्षता सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति प्रकाश प्रभाकर नवलकर कर रहे हैं। समिति में जनगणना आयुक्त सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी दुर्गा शंकर मिश्रा, सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी बालाजी श्रीवास्तव और डॉ. शमिका रवि शामिल हैं। गृह मंत्रालय में संयुक्त सचिव (फॉरेनर्स-I) को सदस्य सचिव बनाया गया है।
समिति जम्मू प्रवास के दौरान आबादी के मौजूदा पैटर्न, उसमें हुए बदलाव, संभावित कारणों और उनके सामाजिक एवं प्रशासनिक प्रभावों से संबंधित जानकारी जुटाएगी।
अधिकारियों के अनुसार फिलहाल समिति का कार्यक्रम जम्मू संभाग तक सीमित है और कश्मीर घाटी के दौरे की कोई योजना नहीं है।
केंद्र सरकार ने समिति को केवल जम्मू-कश्मीर तक सीमित जांच का जिम्मा नहीं दिया है, बल्कि समिति देश के विभिन्न हिस्सों में अवैध आव्रजन और अन्य असामान्य कारकों से होने वाले जनसांख्यिकीय बदलावों का व्यापक अध्ययन करेगी। विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक समुदायों के बीच आबादी के बदलते स्वरूप, उसके कारणों और संभावित प्रभावों का भी विश्लेषण किया जाएगा। समिति अपनी रिपोर्ट के आधार पर नीतिगत, विधायी और प्रशासनिक उपायों की सिफारिश करेगी। उसे एक वर्ष के भीतर रिपोर्ट सौंपनी है जबकि जरूरत पड़ने पर गृह मंत्रालय इसके कार्यकाल को छह महीने तक बढ़ा सकता है।
जम्मू संभाग में भी अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों को लेकर सुरक्षा और प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई होती रही है। हाल के दिनों में रामबन में बांग्लादेशी नागरिकों की गिरफ्तारी का मामला भी सामने आया है। प्रशासन की ओर से अवैध रोहिंग्या समेत अन्य विदेशी नागरिकों की पहचान और उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए कदम उठाए गए हैं।
ऐसे में समिति का जम्मू दौरा उसकी व्यापक राष्ट्रीय पड़ताल की अहम कड़ी माना जा रहा है।
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हिन्दुस्थान समाचार / बलवान सिंह

