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कठुआ में मवेशी तस्करी का बढ़ता जाल-कठुआ में पुलिस कार्रवाई के बावजूद नहीं थम रहा गोरखधंधा -जब तक कानून सख्त नहीं होगा तस्करों में कार्रवाई का डर नहीं बनेगा

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कठुआ में मवेशी तस्करी का बढ़ता जाल-कठुआ में पुलिस कार्रवाई के बावजूद नहीं थम रहा गोरखधंधा -जब तक कानून सख्त नहीं होगा तस्करों में कार्रवाई का डर नहीं बनेगा


कठुआ, 09 मार्च (हि.स.)। जिला कठुआ में मवेशी तस्करी के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। हालांकि जम्मू-कश्मीर पुलिस समय-समय पर कार्रवाई कर पशु तस्करों को पकड़ रही है और मवेशियों को मुक्त करवा रही है, लेकिन इसके बावजूद तस्कर नए-नए हथकंडे अपनाकर इस अवैध धंधे को जारी रखे हुए हैं।

हाल के मामलों में सामने आया है कि तस्कर अब तस्करी के लिए अलग-अलग तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। कभी तेल के टैंकरों, पानी के टैंकर, ट्रकों में मवेशियों को छिपाकर ले जाया जाता है तो कभी छोटे वाहनों का सहारा लिया जाता है। चिंताजनक बात यह है कि अब तस्कर 30 से 40 लाख रुपये तक की महंगे वाहनों का इस्तेमाल भी पशु तस्करी के लिए कर रहे हैं। यह सवाल उठना लाजमी है कि आखिर इस अवैध धंधे में ऐसा क्या मुनाफा है कि तस्कर इतनी महंगी गाड़ियों को भी इसमें झोंक रहे हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि मवेशी तस्करी एक संगठित नेटवर्क के रूप में काम कर रही है और इसी कारण तस्कर जोखिम उठाने से भी पीछे नहीं हटते।

लोगों का यह भी कहना है कि जब पुलिस तस्करों को पकड़ती है तो उनके इस्तेमाल किए गए वाहन कुछ समय बाद ही कानूनी प्रक्रिया के तहत छोड़ दिए जाते हैं। कई मामलों में धारा 188 के तहत केस दर्ज होता है, जिसके बाद कुछ ही दिनों में मामूली जुर्माने पर वाहन रिहा हो जाते हैं। यही वजह है कि तस्करों के हौसले बुलंद हो रहे हैं और वे बार-बार इसी धंधे में लौट आते हैं। उधर, पुलिस द्वारा मुक्त करवाए गए मवेशियों को गोशालाओं और अस्थायी शेल्टरों में रखा जाता है, लेकिन वहां भी अब इनकी संख्या इतनी अधिक हो चुकी है कि उनका पालन-पोषण करना मुश्किल होता जा रहा है। कई बार ये मवेशी सड़कों पर आ जाते हैं और दुर्घटनाओं का कारण बनते हैं, जिससे लोगों की जान तक जा चुकी है। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों का मानना है कि अगर इस गोरखधंधे पर पूरी तरह लगाम लगानी है तो सरकार को सख्त कानून बनाना होगा। ऐसा प्रावधान होना चाहिए कि तस्करी में इस्तेमाल होने वाले वाहन जब्त कर लिए जाएं और उन्हें दोबारा रिलीज न किया जाए। साथ ही पकड़े गए तस्करों के लिए तीन साल या उससे अधिक की सख्त सजा का प्रावधान हो, ताकि इस अवैध कारोबार पर प्रभावी रोक लग सके। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक कानून सख्त नहीं होगा और कार्रवाई का डर नहीं बनेगा, तब तक मवेशी तस्करी का यह सिलसिला थमना मुश्किल है। इसलिए अब जरूरत है कि सरकार और प्रशासन मिलकर इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए ठोस कदम उठाएं।

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हिन्दुस्थान समाचार / सचिन खजूरिया