जम्मू-कश्मीर में कैंसर से होने वाली मौतें संघर्ष में हुई मौतों से कहीं अधिक-वहीद पारा
श्रीनगर, 21 जनवरी (हि.स.)। पीडीपी विधायक वहीद पारा ने बुधवार को कहा कि जम्मू-कश्मीर में दशकों के संघर्ष की तुलना में कैंसर से कहीं अधिक लोगों की जान गई है। उन्होंने इसे एक गंभीर जन स्वास्थ्य और शासन संकट बताया जिसके लिए सरकार के तत्काल हस्तक्षेप की आवश्यकता है।
सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में पारा ने कहा कि पिछले पांच वर्षों में लगभग 67,000 लोगों की कैंसर से मृत्यु हुई है जबकि पिछले तीन दशकों में संघर्ष के कारण लगभग इतनी ही मौतें हुई हैं। उन्होंने कहा, जम्मू-कश्मीर में कैंसर संघर्ष की तुलना में 300 गुना अधिक लोगों की जान ले रहा है।
जम्मू-कश्मीर विधानसभा में पुलवामा का प्रतिनिधित्व करने वाले पारा ने कहा कि स्थानीय अस्पतालों पर बढ़ते दबाव और सीमित उपचार क्षमता के कारण परिवारों - विशेष रूप से गरीब पृष्ठभूमि के लोगों को इलाज के लिए क्षेत्र से बाहर जाने के लिए जमीन और अन्य संपत्ति बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
पारा ने कहा, सबसे बड़ी चुनौतियाँ अक्सर वे होती हैं जिन्हें हम देख नहीं पाते, और उन्होंने सरकार से इस मुद्दे को स्वास्थ्य आपातकाल और शासन की विफलता दोनों के रूप में देखने का आग्रह किया।
अपने पोस्ट में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को टैग करते हुए पारा ने कहा कि प्रशासन को जम्मू और कश्मीर में कैंसर देखभाल के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए तत्काल कदम उठाने चाहिए ताकि अनावश्यक मौतों और मरीजों के परिवारों के बीच आर्थिक तंगी को रोका जा सके।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुमन लता

