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भैरो देव झांकी महोत्सव का शुभारंभ : सदियों पुरानी परंपरा में लोक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और सामुदायिक एकता का संगम

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भैरो देव झांकी महोत्सव का शुभारंभ : सदियों पुरानी परंपरा में लोक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और सामुदायिक एकता का संगम


जम्मू, 25 फ़रवरी (हि.स.)। राजौरी शहर में सदियों पुरानी परंपरा के प्रतीक भैरो देव झांकी महोत्सव का बुधवार को विधिवत शुभारंभ हुआ। यह सप्ताहभर चलने वाला अनूठा आयोजन होली से एक सप्ताह पूर्व प्रारंभ होता है और क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। धार्मिक उत्साह और लोक आस्था के साथ मनाया जाने वाला यह पर्व केवल अनुष्ठान नहीं बल्कि सामुदायिक एकता और पारंपरिक जीवन शैली का जीवंत उदाहरण है। तहसील कार्यालय के समीप से झांकी की शुरुआत हुई जिसमें जिला उपायुक्त अभिषेक शर्मा और एसएसपी राजौरी मुख्य रूप से उपस्थित रहे। प्रशासन द्वारा सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे तथा पुलिस और सीआरपीएफ के जवान विभिन्न स्थानों पर तैनात रहे।

महोत्सव का सबसे आकर्षक दृश्य तब देखने को मिलता है जब एक व्यक्ति पूरे शरीर पर काला रंग लगाकर भैरों बाबा का रूप धारण करता है। पारंपरिक वेशभूषा और लोकधुनों के साथ नगर की गलियों से गुजरती यह झांकी श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर देती है। ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच श्रद्धालु आशीर्वाद लेने के लिए आगे बढ़ते हैं और “चिमटा रूपी प्रसाद” ग्रहण करते हैं, जिसे लोहे के चिमटे से प्रतीकात्मक स्पर्श के रूप में दिया जाता है।

स्थानीय मान्यता है कि इस प्रसाद से भय, रोग और नकारात्मक प्रभाव दूर होते हैं। पहाड़ी समुदाय द्वारा पीढ़ियों से संजोई गई यह परंपरा आज पूरे शहर का सामूहिक उत्सव बन चुकी है। महिलाएं पारंपरिक गीत गाती हैं, बच्चे और युवा उत्साहपूर्वक जुलूस में शामिल होते हैं, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठता है। भैरो झांकी महोत्सव न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है बल्कि सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक निरंतरता का भी सशक्त उदाहरण है जो नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य कर रहा है।

हिन्दुस्थान समाचार / राहुल शर्मा