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जम्मू-कश्मीर के पहाड़ी भाषी समुदाय को अनुसूचित जनजाति (एसटी-2) का दर्जा देने के संबंध में जागरूकता अभियान चलाया

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जम्मू, 25 फ़रवरी (हि.स.)।

जम्मू-कश्मीर के पहाड़ी भाषी समुदाय को अनुसूचित जनजाति (एसटी-2) का दर्जा देने के संबंध में जागरूकता अभियान के तहत विस्थापितों के एक प्रतिष्ठित संगठन, जम्मू-कश्मीर शरणार्थी एक्शन कमेटी (जेकेएसएसी) ने आज जम्मू के बिक्रम नगर चट्टा रोड पर प्रमुख विस्थापितों की एक बैठक आयोजित की। बैठक में उमर अब्दुल्ला और उनकी सरकार से अपील की गई कि वे पहाड़ी भाषी लोगों को एसटी-2 का दर्जा देकर न्याय दिलाएं जैसा कि 2025 के पिछले विधानसभा सत्र में आश्वासन दिया गया था क्योंकि यह गैर-विस्थापितों का वैध संवैधानिक और लोकतांत्रिक अधिकार है।

बैठक में उपस्थित लोगों ने जम्मू, कठुआ, सांबा, उधमपुर, रियासी और डोडा आदि में बसे पीओजेके के पहाड़ी भाषी विस्थापितों को अनुसूचित जनजाति (एसटी-2) का दर्जा देने की अपनी वैध मांग को दोहराया। साथ ही जेपीसी रिपोर्ट संख्या 183 को स्वीकार करने और लागू करने की भी मांग की जो पीओजेके के क्षेत्रों को पाकिस्तान के अवैध कब्जे से वापस लेने तक उनके पुनर्वास के लिए एकमात्र उचित और पर्याप्त रोडमैप है।

बैठक में उपस्थित प्रतिभागियों ने सरकार और उसके नामित अधिकारियों के उस संवेदनहीन और भेदभावपूर्ण रवैये की कड़ी निंदा की जिसमें उन्होंने स्पष्ट नियमों और माननीय सामाजिक कल्याण मंत्री श्रीमती सकीना इटू द्वारा सदन में दिए गए स्पष्टीकरण के बावजूद पहाड़ी जातीय समूह के आवेदकों को एसटी-2 श्रेणी का प्रमाण पत्र जारी नहीं किया। उन्होंने कहा कि इन लोगों को जम्मू-कश्मीर के पूर्व क्षेत्र (पीओजेके) को छोड़ने के लिए मजबूर किया गया और वे भारत के जम्मू-कश्मीर और अन्य हिस्सों में पलायन कर गए अपने पीछे अनगिनत रिश्तेदारों के शव छोड़ गए जिनकी उम्र और उम्र दोनों ही अवस्था में थी। इन विस्थापित लोगों को सरकार द्वारा अस्थायी रूप से पुनर्वासित किया गया था।

जम्मू डिवीजन के विभिन्न क्षेत्रों में उनके जीवनयापन के लिए आवंटित भूमि की उपलब्धता के अनुसार, परिणामस्वरूप एक ही गोत्र, विशिष्ट संस्कृति, जातीयता और भाषाई पहचान वाले रक्त संबंधी परिवार अलग-अलग रह जाते हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / रमेश गुप्ता