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जम्मू के सरदारे चक में आर्य समाज मंदिर का भव्य उद्घाटन, पंचकुंडीय महायज्ञ आयोजित

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जम्मू,, 01 नवंबर (हि.स.)।

महर्षि स्वामी दयानंद सरस्वती के 200वें जन्मोत्सव और आर्य समाज की स्थापना के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में रविवार को जम्मू के मंडल क्षेत्र स्थित सरदारे चक में आर्य समाज मंदिर का भव्य उद्घाटन किया गया। आयोजकों के अनुसार, यह जम्मू-कश्मीर का एकमात्र आर्य समाज मंदिर है। इस मौके पर पंचकुंडीय चतुर्वेद शतक पारायण महायज्ञ का आयोजन हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और विद्वानों ने हिस्सा लिया।

कार्यक्रम के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार के बीच यज्ञ में आहुतियां दी गईं और विश्व शांति, सुख-समृद्धि तथा मानव कल्याण की कामना की गई। पूरे आयोजन में श्रद्धा और उत्साह का माहौल देखने को मिला।

इस अवसर पर आर्य प्रतिनिधि सभा जम्मू-कश्मीर के प्रधान ने कहा कि आर्य समाज का मुख्य उद्देश्य वेदों के ज्ञान को लोगों तक पहुंचाना, समाज में फैली कुरीतियों को दूर करना और शिक्षा तथा अच्छे संस्कारों को बढ़ावा देना है। उन्होंने मंदिर के उद्घाटन को क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल मढ़ विधानसभा क्षेत्र के विधायक ने कहा कि महर्षि दयानंद सरस्वती ने समाज से अंधविश्वास और कुरीतियों को खत्म करने के लिए जो प्रयास किए थे, वे आज भी महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र समाज में एकता और नैतिक मूल्यों को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाते हैं।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे स्टेट अवॉर्डी एवं श्री कैलख ज्योतिष एवं वैदिक संस्थान ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत रोहित शास्त्री ने कहा कि महर्षि दयानंद सरस्वती का पूरा जीवन वेदों के प्रचार, महिला शिक्षा, समानता और समाज सुधार के लिए समर्पित रहा।

उन्होंने कहा कि आर्य समाज मंदिर का उद्घाटन केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और वैदिक परंपराओं को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने युवाओं से वेदों, संस्कृत और भारतीय संस्कृति के बारे में जानकारी हासिल करने तथा अच्छे संस्कारों को अपने जीवन में अपनाने की अपील की।

इस मौके पर रेखा गुप्ता, रणविजय शास्त्री, चैन लाल शास्त्री, डॉ. विभा भारती, डॉ. प्रिंका वैदिक, डॉ. सत्य प्रिय, कुलभूषण जम्वाल और लक्की शर्मा सहित कई गणमान्य नागरिक, धार्मिक एवं सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।

कार्यक्रम का समापन वैदिक मंत्रोच्चार, महायज्ञ की पूर्णाहुति और विश्व कल्याण की प्रार्थना के साथ हुआ।

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हिन्दुस्थान समाचार / अश्वनी गुप्ता