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श्री अमरनाथ यात्रा के लिए जम्मू के आधार शिविर भगवती नगर में ऑफ़लाइन रजिस्ट्रेशन शुरू

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जम्मू, 01 जुलाई (हि.स.)। श्री अमरनाथ यात्रा के लिए जम्मू के आधार शिविर भगवती नगर में ऑफ़लाइन रजिस्ट्रेशन बुधवार को शुरू हुआ।

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के यहां से तीर्थयात्रियों के पहले जत्थे को रवाना करने से एक दिन पहले ही सैकड़ों श्रद्धालु तय समय पर पहुंच गए हैं।

3,880 मीटर ऊंचे अमरनाथ गुफा मंदिर की 57 दिन की यात्रा 3 जुलाई को अनंतनाग जिले में पारंपरिक 48 किलोमीटर लंबे नुनवान-पहलगाम रूट और गांदरबल जिले में छोटे लेकिन खड़ी चढ़ाई वाले 14 किलोमीटर लंबे बालटाल रूट से शुरू होगी।

यात्रा के लिए करीब चार लाख तीर्थयात्री पहले ही ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं।

रात भर हुई बारिश से जम्मू में मौसम तो सुहावना हो गया लेकिन इससे तीर्थयात्रियों का उत्साह कम नहीं हुआ। वे यात्रा के लिए पास पाने के लिए सुबह-सुबह ही रजिस्ट्रेशन सेंटर्स के बाहर लाइन में लग गए।

टोकन होल्डर्स के लिए ऑन-द-स्पॉट रजिस्ट्रेशन बुधवार सुबह शुरू हुआ जबकि देश के अलग-अलग हिस्सों से जम्मू पहुंचने वाले तीर्थयात्रियों के लिए टोकन बांटने का काम लगातार दूसरे दिन भी जारी रहा।

रजिस्ट्रेशन और टोकन बांटने के लिए जम्मू आर्टिफिशियल लेक के पास तवी रिवरफ्रंट, गीता भवन, राम मंदिर और

भगवती नगर में काउंटर बनाए गए हैं।

तीर्थयात्रियों का पहला जत्था गुरुवार सुबह भगवती नगर बेस कैंप से रवाना किया जाएगा।

श्रद्धालुओं में उत्तर प्रदेश के रहने वाले संधू राम किशन भी शामिल थे जिनका अनोखा रूप लोगों का ध्यान खींच रहा था।

सिर और छाती पर रुद्राक्ष और अलग-अलग देशों के सिक्कों से सजे किशन ने कहा कि उनका पहनावा भगवान शिव में उनकी अटूट आस्था को दिखाता है।

उन्होंने बताया कि उन्होंने 14 साल तक 'मौन व्रत' रखा था और 2006 से गुफा के दर्शन कर रहे हैं।

उन्होंने रुद्राक्ष को आध्यात्मिक शक्ति का स्रोत बताया और कहा कि वे इस उम्मीद के साथ मंदिर जा रहे हैं कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ देश के प्रधानमंत्री बनेंगे।

रजिस्ट्रेशन सेंटर्स 'हर हर महादेव' और 'बम बम भोले' के जयकारों से गूंज उठे क्योंकि श्रद्धालु सब्र के साथ अपनी बारी का इंतज़ार कर रहे थे। पुणे के छह लोगों के परिवार का हिस्सा रहीं अनुष्का ने बताया कि वह लंबे समय से इस तीर्थयात्रा पर जाने की इच्छा रखती थीं। उन्हें यह प्रेरणा अपने पिता से मिली जो पिछले 10 सालों से हर साल यह यात्रा कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, अगले साल मेरे पिता 70 साल के हो जाएंगे और हो सकता है कि वह ज़्यादा समय तक यह यात्रा न कर पाएं। उन्होंने हमें कभी अपने साथ नहीं आने दिया, क्योंकि उनका कहना था कि यह यात्रा बहुत कठिन है। लेकिन अब हम यहां हैं और हमने मिलकर यह यात्रा पूरी करने का पक्का इरादा कर लिया है।

राजस्थान की नीलू संगानी जो अपने माता-पिता के साथ आई हैं ने कहा कि गुफा मंदिर में दर्शन करने के मौके से ज़्यादा ज़रूरी कुछ भी नहीं है।

हिन्दुस्थान समाचार / बलवान सिंह