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जम्मू में दशहरे पर अमर ज्योति राजपूत सभा ने की पारंपरिक शस्त्र पूजा

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जम्मू,, 20 अक्टूबर (हि.स.)।

दशहरे के पावन अवसर पर जम्मू में अमर ज्योति राजपूत सभा की ओर से पारंपरिक शस्त्र पूजा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर पूरे विधि-विधान, श्रद्धा और धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ शस्त्रों की पूजा-अर्चना की गई। आयोजन के माध्यम से राजपूत समाज की सदियों पुरानी परंपराओं, वीरता, साहस और गौरवशाली इतिहास को याद किया गया।

दशहरा पर्व बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक माना जाता है। इस दिन शस्त्र पूजा का राजपूत समाज में विशेष महत्व है। मान्यता है कि शस्त्र केवल युद्ध के साधन नहीं बल्कि धर्म, न्याय, आत्मरक्षा और समाज की सुरक्षा के प्रतीक भी हैं। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए अमर ज्योति राजपूत सभा की ओर से शस्त्र पूजा का आयोजन किया गया।

राजपूत समाज में दशहरे के दिन शस्त्रों की पूजा करने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। यह परंपरा उन वीर योद्धाओं के साहस, बलिदान और संघर्ष की याद दिलाती है जिन्होंने अपने धर्म, संस्कृति, मातृभूमि और समाज की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया। शस्त्र पूजा के माध्यम से नई पीढ़ी को भी अपने पूर्वजों के इतिहास और सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराने का संदेश दिया जाता है।

इस आयोजन का उद्देश्य केवल धार्मिक परंपरा निभाना ही नहीं बल्कि समाज में एकता, भाईचारे, अनुशासन और अपनी संस्कृति के प्रति सम्मान की भावना को मजबूत करना भी था। ऐसे आयोजन आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़े रखने और पुरानी परंपराओं को जीवित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

अमर ज्योति राजपूत सभा की ओर से आयोजित इस शस्त्र पूजा के माध्यम से राजपूत समाज की वीरता और गौरवशाली विरासत को सम्मान देने के साथ-साथ सांस्कृतिक मूल्यों को सहेजकर रखने का संदेश दिया गया।

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हिन्दुस्थान समाचार / अश्वनी गुप्ता