home page

योग साधना से मिटते हैं सभी दुःख-स्वामी राम स्वरूप जी

 | 
योग साधना से मिटते हैं सभी दुःख-स्वामी राम स्वरूप जी


कठुआ, 26 जून (हि.स.)। वेद मन्दिर योल में चल रहे 78 दिवसीय चारों वेदों के यज्ञानुष्ठान के 76वें दिन स्वामी राम स्वरूप जी योगाचार्य ने जिज्ञासुओं को अथर्ववेद मन्त्र 19/8/2 के माध्यम से योग और क्षेम के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मनुष्य को ईश्वर से प्रार्थना करनी चाहिए कि वह योग और क्षेम दोनों की प्राप्ति करे जिससे जीवन में संतुलन और सुरक्षा बनी रहे।

स्वामी जी ने यजुर्वेद मन्त्र 7/4 का उल्लेख करते हुए बताया कि मनुष्य अष्टांग योग को अपनाने के योग्य है। उन्होंने पतंजलि योग सूत्र 2/29 का हवाला देते हुए यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधिकृइन आठ अंगों को जीवन में अपनाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि प्राणायाम के माध्यम से शरीर के प्राणों का नियंत्रण कर साधक अपने चित्त की चंचल वृत्तियों को नियंत्रित कर सकता है। योग साधना से मन बहिर्मुखी से अंतर्मुखी बनता है, जिससे अविद्या और अन्य दोषों का नाश होता है और साधक परमात्मा की प्राप्ति की ओर अग्रसर होता है।

स्वामी राम स्वरूप जी ने कहा कि वेदों का अध्ययन हमें नित्य यज्ञ, नाम-स्मरण और योग साधना का मार्ग दिखाता है। इन साधनों के माध्यम से मनुष्य न केवल पापों और दुःखों से मुक्ति पा सकता है बल्कि जीवन में ही मोक्ष की अवस्था को प्राप्त कर सकता है। उन्होंने भगवद्गीता के श्लोक 6/17 का उल्लेख करते हुए कहा “योगो भवति दुःखहा” अर्थात योग साधना सभी दुःखों का अंत कर देती है।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / सचिन खजूरिया