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19 अप्रैल को मनाई जाएगी अक्षय तृतीया, दान-पुण्य और शुभ कार्यों का विशेष संयोग

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जम्मू, 18 अप्रैल (हि.स.)। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाने वाली अक्षय तृतीया इस वर्ष 19 अप्रैल, रविवार को मनाई जाएगी। श्री कैलख ज्योतिष एवं वैदिक संस्थान ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं प्रधान ज्योतिषाचार्य महंत रोहित शास्त्री ने बताया कि तृतीया तिथि 19 अप्रैल को सुबह 10:50 बजे प्रारंभ होकर 20 अप्रैल को सुबह 7:28 बजे समाप्त होगी, लेकिन मध्याह्नव्यापिनी तिथि 19 अप्रैल को होने के कारण पर्व इसी दिन मनाया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस दिन कृत्तिका नक्षत्र, आयुष्मान योग तथा तैतिल और गर करण का विशेष संयोग बन रहा है। साथ ही चंद्रमा अपनी उच्च राशि वृषभ में स्थित रहेंगे जिससे इस पर्व का महत्व और अधिक बढ़ जाता है।

महंत रोहित शास्त्री के अनुसार ‘अक्षय’ का अर्थ है—जो कभी समाप्त न हो। इस दिन किए गए दान, यज्ञ, तर्पण और पूजन का फल अक्षय माना जाता है। इसे ‘सर्वसिद्धि मुहूर्त’ भी कहा जाता है जिसमें बिना पंचांग देखे किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत की जा सकती है। उन्होंने बताया कि इस दिन सोना-चांदी, बर्तन, भूमि, मकान और वाहन की खरीदारी शुभ मानी जाती है। साथ ही घी, शक्कर, अनाज, फल, कपड़े, जौ, गेहूं, सत्तू, दही-चावल, मिट्टी के घड़े, कूलर-पंखे आदि का दान विशेष पुण्यदायी होता है, खासकर गर्मी के मौसम में शीतलता प्रदान करने वाली वस्तुओं का दान करना अत्यंत शुभ माना गया है।

अक्षय तृतीया का धार्मिक महत्व भी विशेष है। इस दिन भगवान परशुराम जी की जयंती मनाई जाती है। साथ ही कई पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन सतयुग और त्रेतायुग का आरंभ, कुबेर को धन की प्राप्ति, श्रीकृष्ण-सुदामा मिलन, बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलना जैसे महत्वपूर्ण प्रसंग जुड़े हुए हैं। महंत रोहित शास्त्री ने श्रद्धालुओं से इस पावन अवसर पर पूजा-अर्चना, दान-पुण्य और धार्मिक कार्यों में भाग लेकर पुण्य लाभ अर्जित करने की अपील की।

हिन्दुस्थान समाचार / राहुल शर्मा