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भर्ती आवेदन शुल्क पर अभाविप ने उठाए सवाल, नायब तहसीलदार परीक्षा पर मांगी स्पष्टता

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जम्मू, 05 मार्च (हि.स.)। जम्मू-कश्मीर में बढ़ती बेरोजगारी के बीच भर्ती परीक्षाओं के आवेदन शुल्क को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) जम्मू-कश्मीर ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। संगठन का कहना है कि जब शिक्षित युवा रोजगार के अवसरों के लिए संघर्ष कर रहे हैं, ऐसे समय में भर्ती आवेदन की ऊंची फीस उनके ऊपर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल रही है। सरकार ने हाल ही में विधानसभा में जानकारी दी कि जम्मू और कश्मीर लोक सेवा आयोग (जेकेपीएससी) और जम्मू और कश्मीर सेवा चयन बोर्ड (जेकेएसएसबी) ने पिछले दो वित्तीय वर्षों में आवेदन शुल्क के रूप में लगभग 48.88 करोड़ रुपये एकत्र किए हैं। जबकि जम्मू-कश्मीर में बेरोजगारी दर लगभग 6.7 प्रतिशत बताई जा रही है। ऐसे में बेरोजगार अभ्यर्थियों से इतनी बड़ी राशि वसूले जाने को लेकर पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं।

अभाविप ने विशेष रूप से नायब तहसीलदार 2025 भर्ती परीक्षा का मुद्दा उठाया है, जिसे जेकेएसएसबी ने उम्मीदवारों से आवेदन शुल्क जमा कराने के बाद स्थगित कर दिया था। हजारों अभ्यर्थियों ने उम्मीद के साथ आवेदन किया था लेकिन परीक्षा की नई तिथि अब तक घोषित नहीं की गई है। साथ ही जमा की गई फीस को लेकर न तो किसी प्रकार की वापसी व्यवस्था घोषित की गई है और न ही उसके उपयोग को लेकर कोई सार्वजनिक जानकारी दी गई है।

अभाविप ने जेकेएसएसबी से नायब तहसीलदार भर्ती 2025 की स्थिति पर तुरंत स्पष्टता देने और परीक्षा आयोजित करने के लिए निश्चित समयसीमा घोषित करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि जो अभ्यर्थी लंबे समय तक इंतजार नहीं करना चाहते, उन्हें फीस वापसी का विकल्प दिया जाना चाहिए। अभाविप जम्मू-कश्मीर के राज्य सचिव सन्नक श्रीवत्स ने कहा कि बेरोजगार युवाओं पर बिना समयबद्ध परीक्षा के भारी आर्थिक बोझ डालना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने मांग की कि भर्ती प्रक्रियाओं को पारदर्शी, जवाबदेह और समयबद्ध बनाया जाए ताकि युवाओं का भरोसा बहाल हो सके। साथ ही संगठन ने भर्ती आवेदन शुल्क में कमी, आर्थिक रूप से कमजोर और बेरोजगार उम्मीदवारों को फीस में छूट तथा परीक्षा शुल्क के उपयोग का सार्वजनिक ऑडिट करने की भी मांग दोहराई।

हिन्दुस्थान समाचार / राहुल शर्मा