home page

अखनूर पुल पर “युवराज करन सिंह ब्रिज” नाम का होर्डिंग बोर्ड स्थापित

 | 

जम्मू, 07 अप्रैल (हि.स.)।

ऐतिहासिक पहचान को बहाल करने और सांस्कृतिक भावनाओं को सम्मान देने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए युवा राजपूत सभा (बाईआरएस) ने आज अखनूर पुल पर “युवराज करन सिंह ब्रिज” नाम का होर्डिंग बोर्ड स्थापित किया है।

सभा का कहना है कि यह पुल वर्ष 1931 में युवराज करन सिंह के सम्मान में बनाया गया था और उसी नाम से जाना जाता था लेकिन समय के साथ खासतौर पर आज़ादी के बाद सरकारी उपेक्षा के कारण इसका मूल नाम धीरे-धीरे गायब हो गया।

सभा के पदाधिकारियों ने बताया कि यह पहल पुल की ऐतिहासिक पहचान को पुनर्स्थापित करने और लंबे समय से चली आ रही अनदेखी को सुधारने का प्रयास है। युवा राजपूत सभा ने पहले भी संबंधित अधिकारियों को कई ज्ञापन सौंपकर पुल के मूल नाम को आधिकारिक रूप से बहाल करने की मांग की थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई न होने पर संगठन को यह कदम उठाना पड़ा।

इस मौके पर युवा राजपूत सभा के मुख्य प्रवक्ता विशाल सिंह ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि संगठन के सैकड़ों नेता, सदस्य और समर्थक अखनूर पुल पर एकजुट होकर शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र हुए और “युवराज करन सिंह ब्रिज” नाम का बोर्ड लगाया। यह कार्यक्रम बाईआरएस के अध्यक्ष मनदीप सिंह रिम्पी की अध्यक्षता में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में पूर्व अध्यक्ष विक्रम सिंह विक्की, राजन सिंह हैप्पी, संस्थापक सदस्य राजिंदर सिंह, राजेश सिंह और रंजीत सिंह, कोर कमेटी सदस्य पुष्विंदर सिंह, मोहन सिंह और बबलू सिंह समेत बड़ी संख्या में समर्थक मौजूद रहे।

सभा ने दोहराया कि यह मांग ऐतिहासिक तथ्यों और आम लोगों की भावनाओं पर आधारित है। संगठन ने प्रशासन से अपील की है कि इस मामले का संज्ञान लेते हुए जल्द से जल्द “युवराज करन सिंह ब्रिज” नाम को आधिकारिक मान्यता दी जाए। कार्यक्रम शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ और सदस्यों ने भविष्य में भी विरासत, पहचान और ऐतिहासिक सच्चाई को बनाए रखने के लिए लोकतांत्रिक तरीके से प्रयास जारी रखने का संकल्प लिया।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / रमेश गुप्ता