वैदिक संदेश से आत्मशुद्धि और कर्तव्यबोध का आह्वान
कठुआ, 10 अगस्त (हि.स.)। आर्य समाज मंदिर कठुआ में आयोजित 28वीं अमृत कथा के सातवें दिन वैदिक चिंतन, आत्मशुद्धि और कर्तव्यबोध का संदेश प्रमुख रूप से उभरकर सामने आया। पूजनीय गायत्री देवी ने अपने प्रवचन में कहा कि वेद मानव को सत्य, ज्ञान, विवेक और श्रेष्ठ आचरण के साथ जीवन जीने की दिशा देते हैं।
उन्होंने श्रद्धालुओं को आत्मचिंतन करते हुए अपने विचार, वाणी और कर्मों को सुधारने की प्रेरणा दी तथा कहा कि वास्तविक परिवर्तन भीतर से शुरू होता है। महर्षि दयानंद सरस्वती के संदेश का उल्लेख करते हुए उन्होंने अंधानुकरण से बचने और विवेकपूर्ण दृष्टिकोण अपनाने पर बल दिया। गायत्री देवी ने परिवार को संस्कारों की प्रथम पाठशाला बताते हुए बच्चों में नैतिक मूल्यों के विकास पर जोर दिया तथा युवाओं से नशे व गलत संगति से दूर रहकर शिक्षा और सकारात्मक कार्यों में जुड़ने का आह्वान किया। इस दौरान वैदिक भजनों से वातावरण भक्तिमय बना रहा।
आर्य समाज कठुआ के प्रधान बिशन भारती ने कहा कि अमृत कथा का उद्देश्य वेदों के संदेश को जीवन में उतारना है और अधिक से अधिक लोगों से इसमें भाग लेने की अपील की।
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हिन्दुस्थान समाचार / सचिन खजूरिया

