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जम्मू संभाग के 4 ज़िलों में 699 हादसों में 88 लोगों की मौत, 1,000 से ज़्यादा घायल, 8,000 से ज़्यादा राइडर्स पर जुर्माना लगाया गया

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जम्मू, 15 सितंबर(हि.स.)। इस साल के पहले सात महीनों में जम्मू संभाग के कठुआ, सांबा, राजौरी और पुंछ में सड़क हादसों में 88 लोगों की मौत हुई और 1,000 से ज़्यादा लोग घायल हुए। इसे देखते हुए जम्मू ग्रामीण ट्रैफिक पुलिस ने दो-पहिया वाहनों से जुड़े नियमों के उल्लंघन के खिलाफ़ एक खास अभियान चलाया।

इन हादसों में 44 प्रतिशत मामले दो-पहिया वाहनों से जुड़े थे। पुलिस ने नियमों का उल्लंघन करने वाले 8,675 लोगों पर कार्रवाई की। ट्रैफिक पुलिस (जम्मू ग्रामीण) के प्रवक्ता ने बताया कि 1 से 14 सितंबर तक चला यह जागरूकता और प्रवर्तन अभियान, दुर्घटनाओं के आंकड़ों के विश्लेषण के बाद चलाया गया था। इस विश्लेषण में इन चार जिलों में हादसों में दो-पहिया वाहनों की बड़ी भूमिका सामने आई थी। जम्मू ग्रामीण ट्रैफिक पुलिस द्वारा 1 जनवरी से 31 जुलाई तक के सड़क दुर्घटनाओं के आंकड़ों के विश्लेषण के अनुसार इन चार जिलों में कुल 699 दुर्घटनाएं दर्ज की गईं जिनमें 88 लोगों की मौत हुई और 1001 लोग घायल हुए।

उन्होंने बताया कि विश्लेषण से पता चला कि 309 दुर्घटनाओं में दो-पहिया वाहन शामिल थे जो इस अवधि में दर्ज कुल दुर्घटनाओं का 44 प्रतिशत है। आंकड़ों से यह भी पता चला कि 39 जानलेवा दुर्घटनाओं में दो-पहिया वाहन शामिल थे।

प्रवक्ता ने बताया कि दो-पहिया वाहनों से जुड़ी दुर्घटनाओं में 384 लोग घायल हुए जबकि 144 मामले ऐसे थे जिनमें सिर्फ़ एक ही वाहन (दो-पहिया) शामिल था। उन्होंने बताया कि नेशनल हाईवे पर 102 दुर्घटनाओं (41 प्रतिशत) में दो-पहिया वाहन शामिल थे जबकि अन्य सड़कों पर 210 दुर्घटनाएं (47 प्रतिशत) दो-पहिया वाहनों से जुड़ी थीं।

खास बात यह है कि दुर्घटना के शिकार लोगों में से 27 प्रतिशत की उम्र 26 साल से कम थी। इस दौरान हुई कुल 699 सड़क दुर्घटनाओं में से 445 (64 प्रतिशत) ऐसी थीं जिनमें सिर्फ़ एक ही गाड़ी शामिल थी। बढ़ती चिंता को देखते हुए जम्मू की ग्रामीण ट्रैफिक पुलिस ने सभी चार ज़िलों में एक व्यापक जागरूकता और नियम लागू करने का अभियान शुरू किया। जागरूकता गतिविधियों के साथ-साथ नियमों का उल्लंघन करने वालों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई भी की गई। प्रवक्ता ने बताया कि अभियान के दौरान कुल 8,675 चालान काटे गए। इनमें से 5,767 राइडर्स पर बिना हेलमेट गाड़ी चलाने के लिए कार्रवाई की गई जबकि 1152 पीछे बैठने वालों (पिलियन राइडर्स) पर हेलमेट न पहनने के लिए जुर्माना लगाया गया और 1106 मामले ट्रिपल राइडिंग (एक गाड़ी पर तीन लोगों के सवार होने) के दर्ज किए गए।

उन्होंने बताया कि इस अभियान के तहत गाड़ी चलाते समय मोबाइल फ़ोन इस्तेमाल करने वाले 188 राइडर्स, खतरनाक तरीके से गाड़ी चलाने वाले 260 लोगों और वैध ड्राइविंग लाइसेंस के बिना गाड़ी चलाने वाले 146 लोगों के ख़िलाफ़ भी कार्रवाई की गई।

तीन नाबालिग़ दो-पहिया वाहन चलाते हुए पकड़े गए जिसके बाद उनके वाहन ज़ब्त कर लिए गए। इसके अलावा 50 राइडर्स पर वाहनों में गैर-कानूनी बदलाव (मॉडिफ़िकेशन) करने के लिए कार्रवाई की गई। प्रवक्ता ने बताया कि कुल मिलाकर इस विशेष अभियान के दौरान ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन के लिए 187 वाहन ज़ब्त किए गए। उन्होंने बताया कि अभियान के दौरान नागरिकों, खासकर युवाओं को सड़क सुरक्षा नियमों और मोटर वाहन अधिनियम के प्रावधानों के बारे में जागरूक करने के लिए शिक्षण संस्थानों, ट्यूशन सेंटरों, बस स्टैंडों, खेल के मैदानों, पुस्तकालयों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर 267 जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए।

जम्मू की ग्रामीण ट्रैफिक पुलिस ने राजौरी और पुंछ ज़िलों में सड़क पर ही सड़क सुरक्षा काउंसलिंग सत्र भी आयोजित किए जहाँ सड़क का इस्तेमाल करने वालों से बातचीत के लिए खास तौर पर कैनोपी (शेड) लगाई गई थीं।

प्रवक्ता ने बताया कि यह पहल बिना चालान, सिर्फ़ काउंसलिंग के नए कॉन्सेप्ट पर आधारित थी। उन्होंने बताया कि सड़क का इस्तेमाल करने वालों, खासकर दो-पहिया वाहन चालकों को कैनोपी के नीचे बैठने के लिए बुलाया गया और उन्हें हेलमेट के इस्तेमाल, ट्रैफिक अनुशासन, सुरक्षित ड्राइविंग के तरीकों और सड़क पर जोखिम भरे व्यवहार के नतीजों के बारे में समझाया गया।

हिन्दुस्थान समाचार / राधा पंडिता