इस वर्ष कश्मीर में एनडीपीएस अधिनियम के तहत 1,500 से अधिक मामले दर्ज किए गए-आईजीपी कश्मीर
श्रीनगर, 05 नवंबर (हि.स.)। इस वर्ष कश्मीर में मादक पदार्थों और मनोरोगी पदार्थों (एनडीपीएस) अधिनियम के तहत 1,500 से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं और मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई के तहत लगभग 2,000 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
श्रीनगर पुलिस नियंत्रण कक्ष में कार्यभार संभालने के बाद अपनी पहली मीडिया वार्ता में आईजीपी ने कहा कि पुलिस मादक पदार्थों के नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई तेज कर रही है जिसमें न केवल तस्करों बल्कि उनके वित्तीय चैनलों और सहयोगियों पर भी ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि मादक पदार्थों से संबंधित मामलों में लगभग 1.10 करोड़ रुपये नकद बरामद किए गए हैं जबकि मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़ी करोड़ों रुपये की संपत्तियां जब्त की गई हैं।
इसके अलावा लगभग 1.31 करोड़ रुपये से जुड़े 567 बैंक खाते फ्रीज कर दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस श्रीनगर के डाउनटाउन में सक्रिय लोगों सहित मादक पदार्थों के व्यापार में शामिल वित्तीय नेटवर्क और सहयोगियों को भी निशाना बना रही है।
युवाओं से मादक पदार्थों के दुरुपयोग के खिलाफ लड़ाई में शामिल होने की अपील करते हुए कुमार ने उनसे मादक पदार्थों की तस्करी के बारे में जानकारी साझा करने का आग्रह किया और आश्वासन दिया कि सूचना देने वालों की पहचान गोपनीय रखी जाएगी।
उन्होंने कहा कि पुलिस आपके साथ है और लोगों को आगे आकर समाज को नशामुक्त बनाने में मदद करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने नशे की लत से जूझ रहे व्यक्तियों से भी आग्रह किया कि वे अधिकारियों से संपर्क करने में संकोच न करें, बल्कि पुलिस या पुनर्वास केंद्रों से सहायता लें।
साइबर अपराध पर आईजीपी ने युवाओं को संगठित ऑनलाइन धोखाधड़ी नेटवर्क विशेष रूप से उन नेटवर्कों का हिस्सा बनने से सावधान किया जिनमें फर्जी बैंक खाते शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि हाल ही में साइबर अपराध की शिकायतों में 54 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है। उन्होंने आगे कहा कि पुलिस ने धोखाधड़ी की गई राशि का लगभग 13-14 प्रतिशत बरामद किया है और पीड़ितों को 7 करोड़ रुपये से अधिक लौटाए हैं। कुमार ने युवाओं से आग्रह किया कि वे ऑनलाइन धोखाधड़ी से प्राप्त धन को स्थानांतरित करने के लिए अपने बैंक खातों का दुरुपयोग न होने दें और चेतावनी दी कि ऐसे लेन-देन में सहायता करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की
जा सकती है।
आईजीपी ने विशेष रूप से युवाओं के बीच तेज गति से वाहन चलाने और लापरवाही से साइकिल चलाने की घटनाओं पर चिंता व्यक्त की और उनसे यातायात नियमों का पालन करने और सड़कों पर जिम्मेदार व्यवहार अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि पुलिस चाहती है कि युवा सार्वजनिक सुरक्षा बनाए रखने और नशीली दवाओं के दुरुपयोग, साइबर अपराध और यातायात नियमों के उल्लंघन सहित सामाजिक चुनौतियों से निपटने में भागीदार बनें।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुमन लता

