नैनीताल में पर्यटन, बेहतर उम्मीदों के साथ मिली-जुली स्थिति
नैनीताल, 24 मई (हि.स.)। पर्वतीय पर्यटन नगरी सरोवरनगरी नैनीताल ग्रीष्मकालीन पर्यटन सत्र इस वर्ष बीते वर्षों के सापेक्ष कुछ अलग तस्वीर प्रस्तुत करता नजर आ रहा है। औपचारिक तौर पर एक मई से 15 जून तक 45 दिन के माने जाने वाले ग्रीष्मकालीन पर्यटन सत्र का लगभग आधा समय बीत जाने को है।
इस दौरान रविवार को नगर में सप्ताहांत पर पर्यटकों की भीड़भाड़ है, लेकिन होटल अभी भी पूरे नहीं भर पा रहे हैं, या ऑनलाइन बुकिंग पर ऑटोमैटिक छूट के साथ किसी तरह भर पा रहे हैं। वाहनों का जाम जिस तरह पिछले वर्षों में लगता था, वैसा अब तक नजर नहीं आ रहा है।
रूसी बाइपास या नारायण नगर में पुलिस ने वाहनों को नगर में पार्किंग सुविधाओं के भरने और वाहनों के दबाव को देखते हुए संतुलित करने के उद्देश्य से सप्ताहांत पर रोकना प्रारंभ कर दिया है, किंतु पिछले वर्षों जैसी बड़ी समस्या अब तक सामने नहीं आयी है।
नगर की लोवर माल रोड कई माह से चल रहे सुदृढ़ीकरण के कार्यों के कारण वाहनों के आवागमन के लिये रोकी गयी है, ऐसे में ऊपरी यानी मुख्य माल रोड के आधे हिस्से में वाहन एक की जगह दोनों दिशाओं से चल रहे हैं, फिर भी अब तक काम चल जा रहा है, जबकि पिछले वर्षों में लोवर माल रोड पर इन दिनों मल्लीताल से अदम ताल पुस्तकालय तक वाहनों का जाम लग जाया करता था।
अलबत्ता नगर की माल रोड पर सैलानियों के लिये पैदल घूमने का स्थान नहीं बचा है। इससे बचने के लिये आज से प्रशासन ने शाम को 6 से 8 की जगह 6 से 9 बजे तक वाहनों का प्रवेश पूरी तरह से प्रतिबंधित रखकर सैलानियों के पैदल घूमने का प्रबंध किया है। रविवर को नैनी झील में नौकायन के लिए सैलानियों को घुमाती नौकाओं की बडस़ी सख्या नजर आई है। यही स्थिति रोप वे केबल कार, चिड़ियाघर, स्नोव्यू, सूखाताल की गुफाओं, लवर्स पॉइंट, लैंड्स इंड व हिमालय दर्शन क्षेत्रों में भी नजर आई।
यह स्थिति तब भी है जबकि दुनिया में चल रही युद्ध जैसी विषम परिस्थितियों के बीच पर्यटन व्यवसायी अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन के घटने और फलस्वरूप देश में व विशेषकर उत्तराखंड जैसे पर्वतीय पर्यटन प्रदेश में पर्यटन में वृद्धि की उम्मीद कर रहे हैं। लेकिन इन वैश्विक व देश की परिस्थितियों से एक हद तक प्रदेश के पर्यटन पर विपरीत प्रभाव भी पड़ रहा है।
इसका कारण देश में डीजल एवं पेट्रोल को लेकर एक वर्ग में बनी भ्रम की स्थिति, पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश में कई जगह पेट्रोलियम पदार्थों की उपलब्धता में भ्रमवश अथवा आपूर्ति के रुकने की संभावना के भयवश बनी समस्याएं भी बतायी जा रही हैं, जिससे एक वर्ग पर्यटन के लिये घर से निकलने से ठिठक रहा है। नगर के होटल रेस्टोरेंट भी पेट्रोलियम पदार्थों की समस्या झेल रहे हैं। 3 हजार रुपये प्रति सिलेंडर से अधिक महंगी हो चुकी वाणिज्यिक गैस के कारण वैकल्पिक ईंधन से काम चलाया जा रहा है। ऐसे में मीनू में व्यंजनों की संख्या घटने के साथ दरों में काफी वृद्धि भी हो गयी है।
मई माह में भी मैदानी क्षेत्रों में कई बार हो रही बारिश से मौसम ठीक होने का भी पहाड़ों के पर्यटन पर मामूली ही सही परंतु प्रभाव पड़ रहा है। यह भी सच्चाई है कि नगर में शाम को भीड़ बहुत नजर आती है, लेकिन होटल व्यवसायी होटल खाली रहने की बात करते हैं लेकिन कमरों की उपलब्धता पूछे जाने पर इंकार भी करते हैं।
इसका कारण है कि वह अभी भी बढ़ा चढ़ाकर किराया नहीं ले पा रहे हैं। यह भी स्पष्ट तौर पर देखा जा रहा है कि नगर में पर्यटन के स्तर में गिरावट आयी है। जो पर्यटक आ रहे हैं उनमें से बड़ी संख्या ऐसे पर्यटकों की है जो अपना भोजन स्वयं लेकर आते हैं और सस्ते गैर पंजीकृत होटलों, गेस्ट हाउसों व होम स्टेज में ठहरते हैं। प्रशासन ने अवैध रूप से व नियम विरुद्ध चल रहे होम स्टे पर कार्रवाई करते हुए नोटिस तो जारी किये हैं, लेकिन अब तक किसी पर स्पष्ट व बड़ी कार्रवाई नहीं की है।
इसके अतिरिक्त बड़े कारणों की बात करें तो नैनीताल होटल एवं रेस्टोरेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष दिग्विजय बिष्ट के अनुसार नीट के प्रश्न पत्रों के टलने और 21 जून को होने के कारण भी इससे जुड़े लाखों अभिभावकों का इस वर्ष गर्मियों के मौसम में छुट्टियों पर घूमने निकलने का कार्यक्रम प्रभावित हुआ है। मैदानी क्षेत्रों में अभी ग्रीष्मकालीन अवकाश न पड़ने के कारण भी सैलानियों की संख्या अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पायी है।
बिष्ट कहते हैं कि कई यूट्यूब व कुछ इलेक्ट्रॉनिक चैनलों के द्वारा ‘नैनीताल में पैर रखने की जगह न होने’ व ‘नैनी झील के सिकुड़ने’ जैसे बढ़ाचढ़ाकर प्रस्तुत किये जाने वाले समाचार व फेक रील्स भी नैनीताल व पहाड़ों की छवि को धूमिल कर रहे हैं। वहीं पुलिस अधीक्षक अपराध एवं यातायात डॉ. जगदीश चंद्र ने बताया कि सप्ताहांत पर वाहनों के दबाव को संतुलित करने के उद्देश्य से आज वाहनों का नगर से बाहर रोका जा रहा है।
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. नवीन चन्द्र जोशी

