श्रीराम कथा में राम जन्म प्रसंग सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु
मीरजापुर, 24 मई (हि.स.)। जमालपुर क्षेत्र के पसही गांव स्थित काली माता मंदिर परिसर में आयोजित सात दिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा के दूसरे दिन रविवार को श्रद्धालु राम जन्म प्रसंग सुनकर भावविभोर हो उठे। कथा व्यास मानस किंकर पं. नीरजानन्द शास्त्री महाराज ने भगवान श्रीराम के अवतार की कथा सुनाते हुए श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कथा के दौरान उन्होंने बताया कि त्रेता युग में अयोध्या के राजा दशरथ संतानहीन थे। गुरु वशिष्ठ की आज्ञा से उन्होंने पुत्रेष्टि यज्ञ कराया, जिसके फलस्वरूप उनकी रानियों ने चार पुत्रों—राम, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न—को जन्म दिया।
उन्होंने कहा कि शास्त्रों के अनुसार भगवान विष्णु ने पृथ्वी पर बढ़ रहे राक्षसों के अत्याचार और अधर्म के विनाश के लिए मानव रूप में अवतार लिया। उस समय राक्षसों का अत्याचार चरम पर था और ऋषि-मुनियों के धार्मिक कार्यों में बाधा डाली जा रही थी। ऐसे में भगवान विष्णु ने चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि, पुनर्वसु नक्षत्र और कर्क लग्न में माता कौशल्या की गोद में श्रीराम के रूप में जन्म लिया।
कथा व्यास ने बताया कि भगवान श्रीराम के जन्म के समय पूरी प्रकृति आनंदित हो उठी थी। मंद-मंद हवाएं चलने लगीं, देवताओं ने आकाश से पुष्प वर्षा की और अयोध्यावासी बधाई गीत गाने लगे। चारों ओर हर्ष और उल्लास का वातावरण छा गया।
इस अवसर पर ग्राम प्रधान दीपक कन्नौजिया, पूर्व प्रधान संजय पाण्डेय, परमहंस पाण्डेय, ब्रजेन्द्र पाण्डेय, नवनीत पाण्डेय, बबलू पाण्डेय, दीपक पाण्डेय, सूर्यनारायण मिश्र, टुनटुन पाण्डेय सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / गिरजा शंकर मिश्रा

