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भगवान का स्मरण मनुष्य के कल्याण का सबसे सुगम साधन : आचार्य मिथिलेशनंदिनी शरण

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भगवान का स्मरण मनुष्य के कल्याण का सबसे सुगम साधन : आचार्य मिथिलेशनंदिनी शरण


मुरादाबाद, 09 जून (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जनपद में सीएल गुप्ता आई इंस्टीट्यूट के सभागार में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन मंगलवार को अयोध्या राम नगरी से पधारे कथा व्यास आचार्य मिथिलेशनंदिनी शरण महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मिणी विवाह का वर्णन किया। भगवान का स्मरण मनुष्य के कल्याण का सबसे सुगम साधन है।

आचार्य मिथिलेशनंदिनी शरण महाराज ने सुदामा मिलन, भक्ति और कर्म के महत्व को भी बताया। उन्होंने कहा कि रुक्मिणी ने भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य गुणों को सुनकर उन्हें मन ही मन अपना पति स्वीकार कर लिया था। भाई रुक्मी के विरोध के बावजूद उन्होंने भगवान को संदेश भेजा। जिसके बाद श्रीकृष्ण ने उनका हरण कर विधिपूर्वक विवाह किया। आचार्य ने शिशुपाल, जरासंध और रुक्मिणी से जुड़े प्रसंगों का भी वर्णन किया।

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हिन्दुस्थान समाचार / निमित कुमार जायसवाल