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माघ मेला प्रकरण के बाद 'उत्तर प्रदेश हिंदू धर्म परिषद' का गठन, शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को मिली अध्यक्षता

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माघ मेला प्रकरण के बाद 'उत्तर प्रदेश हिंदू धर्म परिषद' का गठन, शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को मिली अध्यक्षता


प्रयागराज, 24 मई (हि.स.)। प्रयागराज माघ मेला 2026 के दौरान ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की पालकी शोभायात्रा और गंगा स्नान के समय हुए कथित प्रशासनिक व्यवहार की जांच के लिए गठित नागरिक समाज की तथ्य-अन्वेषण समिति की सिफारिशों के आधार पर 'उत्तर प्रदेश हिंदू धर्म परिषद' (यूपीएचडीपी) के गठन की घोषणा की गई है। परिषद का उद्देश्य सनातन धार्मिक संस्थाओं की स्वायत्तता, संवैधानिक अधिकारों और पारंपरिक व्यवस्थाओं की रक्षा करना बताया गया है। यह जानकारी प्रयागराज में रविवार को मीडिया से वार्ता करते हुए शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने बताया कि नागरिक समाज के तथ्य-अन्वेषण प्रतिवेदन की अनुशंसाओं को लागू करने के लिए ब्रह्मचारी शम्भू प्रेमानंद द्वारा परिषद गठन का प्रस्ताव रखा गया, जिसे सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया गया। परिषद की अध्यक्षता स्वयं शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती करेंगे।

बताया गया कि परिषद एक स्वायत्त एवं वैधानिक स्वरूप वाली संस्था के रूप में कार्य करेगी, जिसमें मंदिरों, अखाड़ों, मठों और अन्य पारंपरिक हिंदू धार्मिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाएगा। परिषद का प्रमुख उद्देश्य संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 के तहत प्राप्त धार्मिक स्वतंत्रता एवं धार्मिक संस्थानों के स्व-प्रबंधन के अधिकारों की रक्षा करना होगा।

इस अवसर पर परिषद के संचालन और विस्तार की रूपरेखा तैयार करने के लिए पांच सदस्यीय समिति का भी गठन किया गया। समिति में के प्रथम सदस्य मनकामेश्वर मठ प्रयागराज के महंत श्रीधरानंद, महामंडलेश्वर अंबरेशानंद (नागपुर), विद्याकांत पांडेय (प्रयागराज), आलोक कुमार त्रिपाठी (प्रयागराज) तथा राकेश मणि त्रिपाठी (प्रतापगढ़) को शामिल किया गया है।

उन्होंने कहा कि परिषद धार्मिक आयोजनों और परंपराओं में अनावश्यक प्रशासनिक हस्तक्षेप के विरुद्ध वैचारिक और विधिक स्तर पर कार्य करेगी। इसके साथ ही संतों, मंदिरों और धार्मिक संस्थाओं के अधिकारों की सुरक्षा के लिए एक विधिक प्रकोष्ठ (लीगल सेल) भी स्थापित किया जाएगा।

परिषद के गठन को सनातन धर्म की परंपराओं, मर्यादाओं और धार्मिक स्वायत्तता की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताते हुए आयोजकों ने कहा कि यह संस्था संत समाज के मार्गदर्शन में प्रदेश भर की धार्मिक संस्थाओं के साथ समन्वय स्थापित कर कार्य करेगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / रामबहादुर पाल