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जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने उतरी राज्य सरकार

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जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने उतरी राज्य सरकार


जयपुर, 24 मई (हि.स.)। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान सरकार जल संरक्षण को जन आंदोलन का स्वरूप देने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। प्रदेशभर में 25 मई से “वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान” की शुरुआत होगी, जो विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून तक चलेगा। अभियान का उद्देश्य केवल जल स्रोतों की सफाई तक सीमित नहीं होकर समाज के हर वर्ग को जल संरक्षण की सामूहिक जिम्मेदारी से जोड़ना है।

राज्य सरकार इसे “जल बचाओ-भविष्य बचाओ” के व्यापक संकल्प के रूप में आगे बढ़ा रही है।

अभियान का शुभारंभ गंगा दशमी के अवसर पर होगा। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा 25 मई को टोंक जिले स्थित बीसलपुर बांध पर जल पूजन और शिव मंदिर में अभिषेक कर अभियान की शुरुआत करेंगे। इसके साथ ही वे ईसरदा, बंध बरेठा और गालवा बांध का हवाई सर्वेक्षण भी करेंगे। भरतपुर में गंगा माता मंदिर में आरती तथा सुजानगंगा नहर में दीपदान कार्यक्रम भी आयोजित होगा।

अभियान के तहत प्रदेशभर के गांवों और शहरों में कुएं, बावड़ियां, तालाब, जोहड़, नहर और अन्य पारंपरिक जल स्रोतों की साफ-सफाई कर उन्हें पुनर्जीवित करने का प्रयास किया जाएगा। जल स्रोतों पर श्रमदान, दीप प्रज्वलन, जल पूजन और जन-जागरण कार्यक्रम आयोजित होंगे। पंचायतों, स्वयंसेवी संस्थाओं, धार्मिक संगठनों, उद्योगपतियों, महिलाओं और युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित की गई है।

राज्य सरकार का मानना है कि वर्षा की अनियमितता और लगातार बढ़ती जल आवश्यकताओं को देखते हुए परंपरागत जल स्रोतों का संरक्षण अत्यंत आवश्यक हो गया है।

इसी उद्देश्य से अभियान को जन भागीदारी से जोड़कर व्यापक स्तर पर चलाया जाएगा।

अभियान के दौरान विद्यार्थियों में जागरूकता लाने के लिए वंदे गंगा प्रभात फेरियां, लेखन प्रतियोगिताएं और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। राजीविका से जुड़ी महिलाओं द्वारा कलश यात्राएं निकाली जाएंगी। साथ ही पीपल पूजन, पौधारोपण और ईको-फ्रेंडली उत्पादों की प्रदर्शनियां भी लगाई जाएंगी।

26 मई को ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की ओर से नुक्कड़ नाटक, जल संरक्षण शपथ और अमृत सरोवर जैसे जल संरक्षण कार्यों का शिलान्यास एवं लोकार्पण किया जाएगा। वहीं “कर्मभूमि से मातृभूमि अभियान” के तहत जल संरक्षण कार्यों की शुरुआत भी होगी।

28 मई को रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और सार्वजनिक स्थलों पर “वंदे गंगा जल सेवा” कार्यक्रम आयोजित होंगे, जहां आमजन को ठंडा पानी उपलब्ध कराया जाएगा।

वर्षा जल संचयन तकनीक, जल परीक्षण और जल बचत के उपायों को लेकर जागरूकता अभियान भी चलाए जाएंगे। सरकारी भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की साफ-सफाई और मरम्मत का कार्य किया जाएगा।

उद्योग विभाग द्वारा जल उपयोग अंकेक्षण, ग्रीन ऑफिस इनीशिएटिव और एनर्जी ऑडिट पर कार्यशालाएं आयोजित होंगी, जबकि कृषि विभाग द्वारा ड्रिप, स्प्रिंकलर और फार्म पॉण्ड जैसी सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों पर किसानों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।

अभियान के तहत गोशालाओं और पशु चिकित्सालयों में स्वच्छता अभियान चलाया जाएगा। स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा पशुओं के लिए स्वच्छ पेयजल और पक्षियों के लिए परिंडे लगाने जैसे कार्यक्रम भी होंगे। इसके अलावा “नो प्लास्टिक डे” के तहत प्लास्टिक कचरे के निष्पादन और सिंगल यूज प्लास्टिक के खिलाफ जन-जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा।

विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून को जिला स्तरीय समापन समारोह आयोजित किए जाएंगे। इस दौरान जल संरक्षण और जनभागीदारी के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले भामाशाहों, पंचायतों, नगर निकायों, संस्थाओं और “जल योद्धाओं” को “जल गौरव सम्मान” से सम्मानित किया जाएगा। पर्यटन विभाग की ओर से सांस्कृतिक संध्या का आयोजन भी होगा।

उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष आयोजित अभियान के दौरान प्रदेश की लगभग 11 हजार ग्राम पंचायतों में 3 लाख 70 हजार से अधिक कार्यक्रम आयोजित किए गए थे। इनमें 42 हजार से अधिक जल स्रोतों की सफाई, 18 हजार 900 कार्यों का लोकार्पण और 5 हजार 600 नए कार्यों की शुरुआत शामिल रही।

इन कार्यक्रमों में करीब 2 करोड़ 53 लाख लोगों ने भागीदारी निभाई थी, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल थीं।

राज्य सरकार इस वर्ष भी अभियान को और व्यापक रूप देकर जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित