प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के 10 वर्ष पूर्ण, 60 हजार से अधिक गर्भवतियों की हुई जांच
जयपुर, 09 जून (हि.स.)। गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए) ने सफलता के 10 वर्ष पूरे कर लिए हैं। इस अवसर पर प्रदेशभर के राजकीय स्वास्थ्य संस्थानों में विशेष पीएमएसएमए सत्र आयोजित किए गए, जिनमें गर्भवती महिलाओं को निःशुल्क प्रसवपूर्व जांच, परामर्श और उपचार सेवाएं दी गईं।
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर शुरू किया गया यह अभियान मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण जनकल्याणकारी कार्यक्रम के रूप में स्थापित हुआ है। पिछले एक दशक में देशभर में 7 करोड़ 50 लाख से अधिक गर्भवती महिलाओं को गुणवत्तापूर्ण और सुलभ प्रसवपूर्व स्वास्थ्य सेवाएं निःशुल्क उपलब्ध कराई गई हैं। अभियान के सकारात्मक प्रभाव से मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी आई है।
उन्होंने गर्भवती महिलाओं से नियमित रूप से अपने निकटतम राजकीय स्वास्थ्य संस्थान में आयोजित पीएमएसएमए सत्रों में पंजीयन करवाकर निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि नियमित जांच से गर्भावस्था के दौरान होने वाली संभावित जटिलताओं की समय रहते पहचान कर सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित किया जा सकता है।
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने बताया कि केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप राज्य में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र स्तर तक गर्भवती महिलाओं को विशेषज्ञ चिकित्सकीय देखरेख में प्रसवपूर्व जांच, रक्त परीक्षण, परामर्श, उच्च जोखिम गर्भावस्था की पहचान तथा उपचार सेवाएं निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही हैं।
प्रदेश में यह अभियान प्रत्येक माह की 9, 18 और 27 तारीख को आयोजित किया जाता है।
उन्होंने बताया कि अभियान के तहत उच्च जोखिम वाली गर्भवतियों की समय पर पहचान कर उनके सुरक्षित मातृत्व और प्रसव के लिए विशेष प्रबंधन किया जा रहा है। गंभीर रक्ताल्पता, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, जुड़वां गर्भावस्था सहित अन्य जटिलताओं की समय पर जांच और उपचार अभियान की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल है।
प्रदेशभर में आयोजित 4120 पीएमएसएमए सत्रों में 60 हजार से अधिक गर्भवती महिलाओं की प्रसवपूर्व जांच की गई।
वहीं ‘मा-वाउचर योजना’ के तहत 13 हजार 211 गर्भवतियों को निःशुल्क सोनोग्राफी कूपन जारी किए गए। इसके अलावा निर्धारित स्तर से कम हीमोग्लोबिन वाली 3 हजार 800 से अधिक गर्भवती महिलाओं को फेरिक कार्बोक्सी माल्टोज इंजेक्शन की निःशुल्क डोज दी गई। अभियान की प्रभावी निगरानी के लिए राज्य, जिला और ब्लॉक स्तर के अधिकारियों द्वारा मॉनिटरिंग की गई। इस दौरान 1,369 वर्चुअल मॉनिटरिंग तथा 176 भौतिक निरीक्षण किए गए।
स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि यह अभियान सुरक्षित मातृत्व और स्वस्थ शिशु जन्म सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित

