मणिपुर में 14 कुकी बंदी रिहा, छह लापता नगा बंधकों का अब भी नहीं चला पता
इम्फाल, 09 जून (हि.स.)। मणिपुर में हालिया सामुदायिक तनाव के बीच एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में 14 कुकी बंदियों को मंगलवार को रिहा कर सेनापति जिला प्रशासन को सौंप दिया गया। उनकी रिहाई यूनाइटेड नगा काउंसिल (यूएनसी) के हस्तक्षेप से संभव हो सकी।
यूएनसी के एक पदाधिकारी ने बताया कि यह निर्णय मानवीय आधार पर लिया गया है। उन्होंने कहा कि यह कदम नगा समुदाय की सांस्कृतिक परंपराओं, मानवाधिकारों के सम्मान तथा संघर्ष की नैतिक मर्यादाओं के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
यूएनसी के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की ओर से नगालैंड के मुख्यमंत्री के माध्यम से छह लापता नगा बंधकों का पता लगाने के प्रयासों का आश्वासन दिया गया था। इसके अलावा विभिन्न ईसाई संगठनों तथा मेघालय के मुख्यमंत्री की अपीलों ने भी कुकी बंदियों की रिहाई का मार्ग प्रशस्त किया।
काउंसिल ने बताया कि मणिपुर सरकार ने भी छह लापता नगा बंधकों की स्थिति का पता लगाने और उनकी सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के लिए प्रयास जारी रहने का भरोसा दिया है।
यह बंधक संकट 13 मई को कोटलें क्षेत्र में हुए एक घातक हमले के बाद शुरू हुआ था। आरोप है कि कांगपोकपी जिले के कोंसाखुल गांव के 18 नागाओं को कुकी समूहों ने लेइलोन वैफेई क्षेत्र में बंधक बना लिया था। इसके जवाब में नगा समूहों ने 28 कुकी लोगों को हिरासत में लिया था।
बाद में दोनों समुदायों के बीच हुई बातचीत के परिणामस्वरूप कई बंदियों को रिहा कर दिया गया, लेकिन छह नगा बंधक और 14 कुकी बंदी अब तक हिरासत में थे। यूएनसी ने पहले भी कुकी बंदियों की रिहाई का प्रयास किया था, लेकिन नगा समुदाय के कुछ वर्गों के विरोध के कारण इसे टाल दिया गया था।
मंगलवार को रिहा किए गए 14 कुकी बंदियों को सेनापति जिला प्रशासन और सेनापति पुलिस थाना के हवाले कर दिया गया। हालांकि, छह लापता नगा बंधकों के संबंध में अब भी कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है और उनकी तलाश के प्रयास जारी हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीप्रकाश

