अनूपपुर: नेत्रदान- महादान’’ से दूर हो सकता है कॉर्नियल ब्लाइंडनेस का अंधकार- डां. जनक सारीवान
अनूपपुर, 09 जून (हि.स.)। मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले के जिला चिकित्सालय में पदस्थ नेत्र सर्जन डॉ. जनक सारीवान ने विश्व नेत्रदान दिवस (10 जून) के अवसर पर नागरिकों से मृत्यु उपरांत नेत्रदान करने और समाज में इसके प्रति जागरूकता फैलाने की अपील की गई है।
उन्होंने मंगलवार को बातचीत में बताया कि वर्तमान में भारत देश में लगभग 11 लाख लोग पारदर्शी पुतली के अंधेपन (कॉर्नियल ब्लाइंडनेस) से पीड़ित हैं, जिसमें प्रतिवर्ष 20 से 25 हजार नए मरीज जुड़ जाते हैं। स्थानीय स्तर पर भी यह समस्या चिंताजनक है, जहां अकेले अनूपपुर जिला चिकित्सालय में ही प्रतिवर्ष 100 से 150 पीड़ित मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। स्थानीय भाषा में ‘‘आंखों में सफेदी आना’’ या ‘‘फूली पड़ जाना’’ कही जाने वाली यह बीमारी मुख्य रूप से चोट, संक्रमण और विटामिन ए की कमी से होती है, जिसका एकमात्र इलाज नेत्रदान के माध्यम से कॉर्नियल प्रत्यारोपण ही है।
उन्होंने कहा कि देश में प्रतिवर्ष होने वाली लगभग 95 लाख मौतों के बावजूद, जागरूकता की कमी और सामाजिक-धार्मिक भ्रांतियों के कारण नेत्रदान का आंकड़ा बेहद कम है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, यदि देश में होने वाली कुल मौतों में से महज 11 लाख लोग भी मृत्यु के उपरांत नेत्रदान करें, तो भारत से कॉर्नियल ब्लाइंडनेस को पूरी तरह समाप्त किया जा सकता है। नेत्रदान का संकल्प व्यक्ति अपने जीवनकाल में लेता है, जिसे मृत्यु के 6 घंटे के भीतर नेत्र बैंक की टीम द्वारा पूरी संवेदनशीलता से संपन्न कराया जाता है। इस पुनीत कार्य से मृत व्यक्ति के जाने के बाद भी उसकी आंखें दुनिया को देख सकती हैं, इसलिए जिला प्रशासन ने नागरिकों से ‘‘नेत्रदान- महादान’’ के इस महाअभियान से जुड़ने का आव्हान किया है।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला

