मंडी की 500 वर्षों की ऐतिहासिक यात्रा के अध्ययन के लिए मंडी पहुंचा जीवाजी विश्वविद्यालय ग्वालियर का दल
मंडी, 09 जून (हि.स.)। मंडी नगर की 500 वर्षों की ऐतिहासिक यात्रा के उपलक्ष्य में सरदार पटेल विश्वविद्यालय मंडी तथा जीवाजी विश्वविद्यालय, ग्वालियर के मध्य हुए समझौता ज्ञापन हस्ताक्षरित हुआ है। जिसके अंतर्गत संकाय एवं विद्यार्थी शैक्षणिक आदान-प्रदान तहत पुरातात्त्विक एवं ऐतिहासिक सर्वेक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर जीवाजी विश्वविद्यालय, ग्वालियर का एक पांच सदस्यीय दल वरिष्ठ इतिहासविद् एवं पुरावेता प्रो. शांतिदेव सिसोदिया के नेतृत्व में मंडी पहुंचा।
सरदार पटेल विश्वविद्यालय मंडी के कुलपति आचार्य ललित कुमार अवस्थी ने दल का स्वागत करते हुए कहा कि यह शैक्षणिक सहयोग भारतीय इतिहास एवं सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि मंडी नगर हिमालयी सभ्यता, संस्कृति और इतिहास का एक महत्वपूर्ण केंद्र रहा है तथा इसके 500 वर्षों के इतिहास का वैज्ञानिक अध्ययन एवं प्रलेखन भावी पीढ़ियों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह सर्वेक्षण क्षेत्रीय इतिहास को राष्ट्रीय इतिहास की व्यापक धारा से जोड़ने में सहायक सिद्ध होगा। उन्होंने इतिहास विभाग तथा कार्यक्रम संयोजक डॉ. राकेश कुमार शर्मा की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार की संयुक्त शोध गतिविधियां अकादमिक सहयोग को नई दिशा प्रदान करेंगी तथा मंडी की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन में महत्वपूर्ण योगदान देंगी।
कार्यक्रम के संयोजक एवं इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ. राकेश कुमार शर्मा ने आगंतुक दल का स्वागत करते हुए सर्वेक्षण कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की।
उन्होंने बताया कि यह अध्ययन मंडी नगर की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं स्थापत्य विरासत के दस्तावेजीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने मंडी के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सर्वेक्षण दल जनपद के अन्य महत्वपूर्ण पुरास्थलों का भी अध्ययन कर अपने निष्कर्ष संयुक्त शोध परियोजना के माध्यम से प्रस्तुत करेगा।
प्रो. शांतिदेव सिसोदिया ने कहा कि मण्डी की ऐतिहासिक धरोहरें पश्चिमी हिमालय की सांस्कृतिक निरन्तरता को समझने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने बताया कि सर्वेक्षण के माध्यम से प्राप्त तथ्यों का उपयोग भविष्य में शोध, प्रकाशन तथा विरासत संरक्षण की योजनाओं में किया जाएगा।
सर्वेक्षण दल ने मंडी नगर के प्रमुख ऐतिहासिक एवं पुरातात्त्विक स्थलों का निरीक्षण किया। इनमें त्रिलोकनाथ मंदिर, पंचवक्त्र महादेव मंदिर, भूतनाथ मंदिर, अर्धनारीश्वर मंदिर, नीलकंठ महादेव मंदिर, महामृत्युंजय मंदिर, राजमहल परिसर तथा नगर के प्राचीन जल स्रोतों और पारंपरिक जल प्रबंधन संरचनाओं का विशेष अध्ययन किया गया। दल ने इन स्थलों की स्थापत्य शैली, मूर्तिकला,अभिलेखीय महत्व तथा सांस्कृतिक परंपराओं से संबंधित जानकारियां संकलित कीं।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुरारी शर्मा

