14 साल के बच्चे के अंगदान से कई मरीजों को मिला जीवन दान
सड़क दुर्घटना में घायल हो गया था मासूम, ब्रेन डेड से हुई मौत
हृदय, लीवर, किडनी, गुर्दे और दोनों कॉर्निया की गई दान, पीजीआई की टीम ने भेजे अंग
रोहतक, 24 मई (हि.स.)। झज्जर जिले के एक 14 वर्षीय मासूम ने मौत के बाद भी जिंदगी की ऐसी मिसाल कायम की है, जिसने पूरे समाज को अंगदान के प्रति जागरूक कर दिया। सड़क हादसे में ब्रेन डेड घोषित हुए इस बच्चे के परिजनों अंगदान कर कई मरीजों को नया जीवन दान दिया है। अंग दान करने की प्रक्रिया सुबह छह बजे ही शुरु कर दी गई, जिसके चलते हृदय, लीवर, किडनी, गुर्दे और दोनों कॉर्निया के दान से कई मरीजों को नया जीवन मिलेगा।
पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ. एच.के. अग्रवाल द्वारा प्रदेश में अंगदान को लेकर चलाई जा रही मुहिम से प्रभावित होकर परिजनों ने अंगदान का ऐतिहासिक फैसला लिया है। झज्जर जिले के गांव निवासी 14 वर्षीय मरीज घायल अवस्था में बीस मई को परिजन उसे पीजीआईएमएस रोहतक लेकर पहुंचे। डॉक्टरों ने भरसक प्रयास किया, लेकिन 21 मई को चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर कुंदन मित्तल के मार्गदर्शन में बनी डॉक्टर तरुण, डॉक्टर महिपाल और डॉक्टर अमरनाथ की कमेटी ने दो बार टेस्ट करने के पश्चात मरीज को ब्रेन डेड घोषित कर दिया। डॉ तरुण ने मरीज के ब्रेन डेड होने के पश्चात सोटो हरियाणा की टीम को दी। डॉ. अग्रवाल खुद चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर कुंदन मित्तल के साथ आईसीयू पहुंचे और गमगीन परिवार से मिले।
कुलपति डॉ. एचके अग्रवाल ने परिजनों से बातचीत की और कहा कि आपका मासूम बच्चा अब लौटकर नहीं आएगा, यह कड़वा सच है। लेकिन उसका दिल किसी और बच्चे के सीने में धड़क सकता है। उसकी आंखें किसी को दुनिया दिखा सकती हैं। आपका बेटा भले ही चला गया, पर वह कई घरों का चिराग बन सकता है। अंगदान जीवन का सबसे बड़ा दान है। यह मौत पर जिंदगी की जीत है। शुरू में परिवार हिचकिचाया, लेकिन मीडिया द्वारा अंगदान के प्रति जागरूकता की खबरें देखकर और काउंसलिंग टीम के समझाने के बाद परिवार अंगदान के लिए सहमत हो गया।
डॉ. अग्रवाल ने परिवार को दिलासा देते हुए कहा कि आपके परिवार ने जो यह साहसिक निर्णय लिया है वह पूरे प्रदेश और देश में अंगदान के प्रति लोगों को जागरूक करेगा।अंगदान से दूसरों की जिंदगी बचाई जा सकती है। चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर कुंदन मित्तल ने बताया कि काउंसलिंग के बाद पिता की आंखें नम हो गईं। उन्होंने कांपती आवाज में कहा कि अगर हमारे बेटे की वजह से किसी मां की गोद सूनी होने, किसी का सुहाग उजड़ने से बच जाए, तो हम तैयार हैं। परिवार ने अंगदान की सहमति दे दी।
गाइडलाइन के तहत जरूरतमंद मरीजों की पहचान कर नियमों के अनुरूप उन्हें अंग अलाट होंगे। साथ ही रविवार सुबह ही पुलिस-प्रशासन कॉरिडोर बना दिया और अंग को अन्य अस्पतालों में पहुंचाया गया। कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल ने पीजीआईएमएस में पिछले दो महीनों में यह पांचवां अंगदान होगा। पीजीआईएमएस के नोडल अधिकारी डॉ. सुखबीर ने बताया कि भारत में हर साल 5 लाख लोगों की मौत अंग न मिलने से होती है। जबकि एक ब्रेन डेड व्यक्ति 8 से 9 जिंदगियां बचा सकता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / अनिल

