पाकिस्तान के इशारे पर नाचते खालिस्तानी
पी. कामता
हर वर्ष छह जून को पंजाब 1984 की घटनाओं को याद करता है। इसी दिन सेना ने स्वर्ण मंदिर परिसर में छुपे खालिस्तान समर्थकों को निकालने के लिए बख्तरबंद गाड़ियों और टैंकों का उपयोग किया था। बयालीस वर्ष पहले ऑपरेशन ब्लू स्टार का समापन भारतीय सेना द्वारा स्वर्ण मंदिर परिसर को हथियारबंद आतंकवादियों के कब्जे से मुक्त कराने के साथ हुआ। कुछ कट्टरपंथी कहते हैं कि इस ऑपरेशन ने गहरे घाव दिए। तब से एक छोटा लेकिन मुखर समूह इन घावों का उपयोग खालिस्तान के नैरेटिव को आगे बढ़ाने के लिए करता रहा है यह सच है कि खालिस्तानी भारत और अधिकांश सिखों की आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व नहीं करते। पंजाब इस बात का हकदार है कि उसके दर्द का राजनीतिक उपयोग न किया जाए और सिख समुदाय को भारत के सबसे मजबूत स्तंभों में से एक के रूप में पहचाना जाए।
1980 के दशक की शुरुआत तक पंजाब बढ़ती हिंसा और उग्रवाद की चुनौती का सामना कर रहा था। जरनैल सिंह भिंडरांवाले के नेतृत्व में हथियारबंद उग्रवादियों ने स्वर्ण मंदिर परिसर को एक मजबूत ठिकाने में बदल दिया था। जून 1984 में सरकार ने ऑपरेशन ब्लू स्टार शुरू किया। इस अभियान में अकाल तख्त को हुए नुकसान और जानमाल की क्षति ने सिख समुदाय के मन पर गहरे घाव छोड़े। इसके बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या और उसके बाद की घटनाओं ने इन घावों को और गहरा कर दिया।
1984 से जुड़े दर्द को स्वीकार करना इतिहास के प्रति ईमानदारी है। यह पीड़ा वास्तविक है, लेकिन इसे खालिस्तान के समर्थन के साथ नहीं जोड़ा जाना चाहिए। भारत के निर्माण और विकास में सिख समुदाय का योगदान असाधारण है। स्वतंत्रता के समय देश की कुल आबादी में उनकी हिस्सेदारी कम होने के बावजूद स्वतंत्रता संग्राम में उनका उल्लेखनीय बलिदान है। विभाजन के दौरान पंजाब ने भारी नुकसान झेला, लेकिन सिख समुदाय ने साहस और परिश्रम से स्वयं को फिर खड़ा किया। हरित क्रांति ने भारत को खाद्यान्न के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में निर्णायक भूमिका निभाई और पंजाब इसका केंद्र रहा।
राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में भी सिखों का योगदान अद्वितीय है। सिख रेजिमेंट, पंजाब रेजिमेंट और सिख लाइट इन्फैंट्री ने देश के लगभग हर प्रमुख सैन्य अभियान में वीरता और समर्पण का परिचय दिया है। जिस समुदाय ने देश की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष किया, राष्ट्र को भोजन दिया और सीमाओं की रक्षा की, उसे व्यापक अलगाववादी सोच से जोड़ना वास्तविकता से परे है। वर्तमान खालिस्तान अभियान मुख्य रूप से विदेशों में सक्रिय कुछ संगठनों और व्यक्तियों द्वारा संचालित किया जाता है। पंजाब के भीतर इसका समर्थन सीमित है।
भारतीय सुरक्षा एजेंसियों और पंजाब पुलिस ने कई बार संकेत दिया है कि पाकिस्तान समर्थित तत्व और कट्टरपंथी नेटवर्क प्रचार, दुष्प्रचार और भड़काऊ गतिविधियों के माध्यम से इस नैरेटिव को जीवित रखने का प्रयास करते हैं। उनका उद्देश्य प्रतिनिधित्व नहीं, बल्कि विभाजन और अस्थिरता पैदा करना है। शोधकर्ताओं और पर्यवेक्षकों का मानना है कि खालिस्तान की चर्चा पंजाब से अधिक प्रवासी राजनीति में दिखाई देती है। अब खालिस्तानी अपना पांव धीरे-धीरे ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया समेत कई और देशों में पसार रहे हैं।
पाकिस्तान ने भले ही कभी यह कुबूल न किया हो लेकिन खालिस्तान आंदोलन के पीछे उसकी भूमिका किसी से भी छिपी नहीं रह गई है। पाकिस्तान के वरिष्ठ रक्षा विशेषज्ञ जैद हामिद का एक वायरल वीडियो इसकी पुष्टि कर चुका है। वो कह रहे हैं कि हमने भारत के खिलाफ खालिस्तान को खड़ा किया। पाकिस्तान अनटोल्ड नाम के एक ट्विटर हैंडल (अब एक्स) पर साझा किए गए वीडियो में हामिद ने कहा, ''हमने पूरे 80 के दशक में, ये वो समय था जब 1971 का भारत से बदला लेना शुरू किया था, उस वक्त सिखों की तहरीक बनाई। हमने कश्मीरी जिहाद को दोबारा खड़ा किया। नागा, असम, नक्सली, माओवादी, नॉर्थ ईस्ट जैसे भारत के अलग-अलग भागों में मदद पहुंचाई। यह सच है कि ऑपरेशन ब्लू स्टार के माध्यम से सरकार ने खालिस्तान आंदोलन को कुचल तो दिया लेकिन उसकी आग जलती रही। अब तो यह ऑस्ट्रेलिया और कनाडा में कई हिंदू मंदिरों को निशाना बना चुके हैं।
खालिस्तान पर बहस भले ही सोशल मीडिया पर सुर्खियां बटोरती हो, लेकिन पंजाब की वास्तविक चुनौतियां कहीं अधिक गंभीर हैं। नशे की समस्या, बेरोजगारी, कृषि संकट, बढ़ता कर्ज और पलायन आज राज्य के सामने सबसे बड़ी चुनौतियां हैं। पंजाब का युवा अलगाववाद नहीं, बल्कि रोजगार, शिक्षा और बेहतर अवसरों की तलाश में है। अनेक परिवार बेहतर भविष्य की उम्मीद में पलायन को विकल्प मान रहे हैं। इन चुनौतियों के बावजूद पंजाब ने हमेशा अपनी दृढ़ता और सेवा भावना का परिचय दिया है। बाढ़, प्राकृतिक आपदाओं और संकट के समय पंजाब के लोग सबसे पहले सहायता के लिए आगे आते रहे हैं।
ऑपरेशन ब्लू स्टार की वर्षगांठ स्मरण, ईमानदारी और आत्मचिंतन का अवसर होनी चाहिए। पंजाब की कहानी केवल संघर्ष या त्रासदी की कथा नहीं है। यह उस समुदाय की कहानी है जिसने भारत की स्वतंत्रता के लिए बलिदान दिया। देश को अन्न दिया। सीमाओं की रक्षा की और राष्ट्र निर्माण में अमूल्य योगदान किया। पंजाब का भविष्य विभाजनकारी विचारों में नहीं, बल्कि आर्थिक अवसरों, सामाजिक प्रगति और राष्ट्रीय एकता में निहित है। ऑपरेशन ब्लू स्टार के बयालीस वर्ष बाद भी कुछ समूह शोर मचा रहे हैं, लेकिन पंजाब की वास्तविक पहचान आज भी त्याग, सेवा, साहस और भारत के प्रति उसके अटूट योगदान से ही परिभाषित होती है।
(लेखक, स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।)
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकुंद

